Month: दिसम्बर 2017

जिंदगी में तड़प। 


तुम्हारे मन में कोई बात होती तो सुन भी लेती।
पर तुम्हारी खामोशी मुझे भी खामोश रहने का पाठ पढ़ा देती है।
जैसे जल बिना मछली वैसे ही तुम्हारी खामोशी तड़पा
रजनी अजीत सिंह 30.12.17
#खामोशी_सवाल
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जिंदगी में जीने की वजह। 

तेरे रिश्तों ने मुझे जीने की वजह दे दी।
कुछ इस तरह तुझे अपने जिंदगी में जगह दे दी।
लगता था हम रिश्तों के बिना टूट जायेंगे।
पर हम वो बेहया का पौधा निकले जो कहीं भी फेक दो अपनी जड़ों को जमा हरे भरे हो जायेगें।
रजनी अजीत सिंह 30.12.17
#जिंदगी😀
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जिंदगी की यादें। 


जिंदगी में रिस्ता निभाने वालों के लिए हम दुंआ करते हैं।
जो रिस्ता तोड़ लेते हैं उसे भी हम यादों में बसाया करते हैं।
रजनी अजीत सिंह 30.12.17
#जिंदगी😀
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जिंदगी में सकूंन दे जाया करो। 

कभी कभी तो मेरे शब्दों का भाव समझ जाया करो।
मेरे शब्दों के साथ मेरे मन की बात को सवाल समझ जवाब तो दे जाया करो।
मेरे फिक्र करने की आदत को समझ कुछ शब्दों से ही मेरी भी फिक्र कर जाया करो।
ढेर सारी बातें न सही कुछ वाक्यों से ही मेरे मन को सकूंन दे जाया करो।
रजनी अजीत सिंह 30.12.17
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जिंदगी में यादों के एहसास। 


याद आये जब तेरी मन की बात कैसे बताएँ।
माना है अपना अपनो से दर्द कैसे छुपायें।
शब्द नहीं मेरे पास पर लेखनी मेरे हाथों में।
मेरे शब्दों का मजाल क्या जो एहसास न कराए।
माना जब तुझको तो रिश्ते अनेक थे।
रिश्ता है तुझसे तो रिश्ते का फर्ज क्यों न निभाएं।
तेरे पर पूरा विश्वास है मन को, पर जब हक न जताया तो कैसे बताएँ।
तेरे मंजिल पाने की हसरत सजाया है हमने।
अब फुर्सत न मिलती तो उदासी क्यों छाये।
मेरे रिश्तों की हकीकत सबने है जाना फिर भी रह गयी मैं तन्हा ये कैसे बताएँ।
रजनी अजीत सिंह 29.11.17।
#‍याद
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जिंदगी में तेरे सर सेहरा सजे। 

किस घड़ी किस नक्षत्र में तुझसे अपना रिश्ता बनाया।
तू समझ के भी मुझे न समझ पाया।
हर बार ही मान सम्मान गंवा तुझको पुकारा।
हर बार ही तुझपर प्यार और ममता लुटाया।
ठिकाना नहीं थी जिंदगी की मेरी फिर खुशियों को लेकर मेरे जिंदगी में आया।
ठिकाना कब का बदल चुका था उड़ते पंक्षी का।
मगर तेरे बातों से मिले एहसास और यादों को मन में अब भी सजाया।
मुझे पता है मुझे मिलना न तुझसे पर एक विश्वास सा है मन में तेरे सर सेहरा सजाये मुझे माँ दिखाये।
बड़े अरमान होते हैं माँ के की मेरे बेटे के सर सेहरा सजे।
और वो भाग्य शाली माँ होती है जिसे ईश्वर ये दिन दिखाए।
रजनी अजीत सिंह 29.1217
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जिंदगी में मीठे प्यार रुपी दर्द की दवा। 

मीठेप्यार रुपी दर्द की दवा क्या है?

आने वाले कल में जब मीठे दर्द का एहसास होगा तब दवा क्या होगा?
अरे! मेरे पास मीठा प्यार नहीं है लेकिन कड़वी दवा जरूर है जो समझ बुझकर डोज दिया जाता है वो समझ भी मुझ में है।
अपने रोग को ठीक करने के लिए माया मोह रूपी ठगनी का परहेज करना ही होगा।
वर्ना ये रोग असाध्य हो जाएगा तो मेरी कड़वी दवा भी काम न करेगी।
चलो एक बार भलाई के लिए मीठा प्यार दे भी दूंं कोशिश करके।
मगर माया मोह रूपी ठगनी का परहेज तो करना ही पड़ेगा। तभी तो दवा के साथ दुआं भी लगेगी।
वर्ना मैं क्या जानू मीठे प्यार रुपी दर्द की दवा क्या है?
प्यार में भी किया कर्म का ही फल सामने आता है बाकी ईश्वर की मर्जी।
किसी ने ठीक ही कहा है –
बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से होय।
रजनी अजीत सिंह 2.1.14
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प्यार बचाओ (Save Love) 

प्यार बचाओ (Save Love)

जैसा कि शीर्षक से ही नया और थोड़ा अटपटा लग रहा होगा। लेकिन ये मेरा कल्पना (धर्म युग की कल्पना में) है लेकिन भविष्य में ये सच भी होगा। इसको पढ़कर लोग मुझे पागल और मूर्ख ही समझेगें। लेकिन जो लोग ऐसा सोचेंगे उन्हें बताना चाहती हूँ कि प्रसिध्द वैज्ञानिक एडिसन को भी, और उनके अविष्कार करने के लिए किये गये प्रयोगों को मूर्खता के ही श्रेणी में रखा गया था। मैं जानती हूँ कि धर्म युग की कल्पना मेरी भी मूर्खता है। लेकिन ये मूर्खता एक दिन हकीकत में जरूर बदलेगा।

चलिए अब मैं आपका ध्यान प्यार बचाओ पर लाना चाहती हूँ। यानी (Save Love) जैसे हमें बचपन से ही सीखाया जाता है जल बचाओ, विजली बचाओ वैसे ही बच्चों को शिक्षा के माध्यम से “प्यार बचाना भी सिखाना चाहिए।

मैं आज की नव युवा पीढ़ी को या आने वाली पीढ़ी को संदेश देना चाहती हूँ कि थोड़ा सा प्यार अपने लाइफ पार्टनर के लिए बचाओ ताकि आने वाला भविष्य या जीवन संवर सके। आज कल गर्लफ्रेंड – ब्वॉयफ्रेंड बनाना आम बात हो गई है। प्यार करना फिर टूट कर बिखरना भी आम बात हो गई है। क्या हम टूटने से पहले नहीं सम्हल सकते हैं? सम्हल सकते हैं यदि हम थोड़ा सा चतुराई और समझदारी दिखाएं तब। अब हम आते हैं गर्लफ्रेंड – ब्वॉयफ्रेंड के शाब्दिक अर्थ पर।

गर्लफ्रेंड का शाब्दिक अर्थ निकलता है – गर्ल =लड़की, फ़ेड =दोस्त। उसी तरह ब्वॉयफ्रेंड का भी शाब्दिक अर्थ वही होगा।

फिर इसमें खास वर्ड कहाँ से आया बीच में। एक लड़की या लड़के से दोस्ती और प्यार करना गलत नहीं है व्लकि उस प्यार को खास बनाकर सपना देख उम्मीद लगाकर प्यार किया जाना गलत है। आज कल प्यार का गलत अर्थ लगाकर ही लोग अपना दिल या दूसरे का दिल तोड़ते हैं, जिसका परिणाम ये होता है। गम मिलता है, दिल टूटता है, एक दूसरे पर दोषारोपण और धोखा देने का नाम मिलता है।

जैसे आजकल लोग किसी भी लड़के या लड़की से बात करते हुए देखकर बड़ा चाव से सोचते हैं कि जरूर ये गर्लफ्रेंड – ब्वॉयफ्रेंड ही होगा। भले ही वह भाई-बहन क्यों न हो। अरे गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड है तो है इसमें शाब्दिक अर्थ से बुरा क्या है? मैं बताऊँ गलत क्या है? गलत हमारी और आपकी सोच है। दोस्त बनाना कहीं से गलत नहीं है। अपने अनुभव और समाज में होने वाले घटनाओं को देखते हुए कह सकते हैं कि हमारी और आपकी दोस्ती के प्रति गंदी सोच गलत है। 10 वर्ष से 20 वर्ष के उम्र में जाते – जाते एक दूसरे के प्रति आकर्षित होना आम बात है। ये प्राकृतिक देन है। लेकिन आकर्षण या दोस्ती या आकर्षण को पहले प्यार या आखिरी प्यार का नाम देना ही भूल है। क्या बेटे का मां की तरफ आकर्षित हो प्यार करना गलत है। या बहन से भाई का प्यार होना गलत है। नहीं इस प्यार को कोई गलत नाम नहीं दे सकता है। क्यों कि इस रिश्ते में गंदी सोच नहीं है, इस रिश्ते में पवित्रता है।

मै समाज से पूछना चाहती हूँ कि क्या ये गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के रिश्तों में ये पवित्रता नहीं आ सकती है। आ सकती है यदि सोच पवित्र बन जाय तो इस रिश्ते को भी गलत रिश्ते के नाम से बचाया जा सकता है। मेरा समाज के उन अनुभवी व्यक्तियों से या इंसानों से प्रार्थना है कृपया इस रिश्ते को भी पवित्र मानकर एक अच्छा रिस्ता बनाने की सीख दें न कि गलत सोच और गंदी सोच से अपवित्र समझ गलत रिस्ते का नाम न दें। यदि ऐसा कोई करता है तो फिर उसके नजर में मां का बच्चे के प्रति आकर्षण, बहन का भाई के प्रति आकर्षण भी गलत ही मानना चाहिए। आकर्षण तो आकर्षण है फिर वो चाहे जिस के प्रति हो। क्यों कि किसी के प्रति आकर्षित होना प्राकृतिक देन या आम बात है। तो गर्लफ्रेंड – ब्वॉयफ्रेंड के प्रति आकर्षित होना कहां से गलत है। जिंदगी में मां फिर बहन उसके बाद, दोस्त, गर्लफ्रेंड फिर पत्नी से जुड़ना प्राकृतिक देन है।

रिस्तों में प्यार या आकर्षण गलत नहीं” मां से प्यार करो माँ सेआकर्षण होना गलत नहीं है। बहन से प्यार करो बहन से आकर्षण गलत नहींहै। लड़की से प्यार करो लड़की से आकर्षण गलत नहीं। दोस्त से प्यार करो दोस्त से आकर्षण गलत नहीं है। सबसे प्यार करो प्यार के प्रति आकर्षण गलत नहीं है । क्या गलत है अपवित्र वाला सोच गलत है। प्यार बचाओ किसके लिए, प्यार बचाओ लाइफ पार्टनर के लिए।

थोड़ा प्यार बचाओ माँ के प्यार से। थोड़ा प्यार बचाओ बहन के प्यार से। थोड़ा प्यार बचाओ गर्लफ्रेंड के प्यार से। थोड़ा – थोड़ा प्यार बचाओ सब रिश्तों से।

भविष्य संवारो प्यार बचा के। जिंदगी खुशहाल बनाओ प्यार बचाके।

जैसे जल बचाते, वैसे प्यार बचाओ थोड़ा – थोड़ा।
खुशियाँ पाओ ज्यादा – ज्यादा।

[ कविता ]

“Save Love कितना जरूरी।

जल बचाना उतना जरूरी।

Save Love कितना जरूरी।

विजली बचाना उतना जरूरी।

प्यार बचाना कितना जरूरी।

करियर बनाना उतना जरूरी।

प्यार बचाना कितना जरूरी।

भविष्य संवारना उतना जरूरी।

प्यार बचाना कितना जरूरी।

भारत को आतंकवाद से बचाना उतना जरूरी।

प्यार बचाओ, प्यार बचाओ।

खुशियाँ पाओ, खुशियाँ पाओ। “

नोट-प्रामरी स्तर को ध्यान में रखते हुए याद करने के लिए। लय बद्ध तरीके से गाने के लिए बनाया गया है। इस लिए सरल शब्दों का प्रयोग किया गया है। एक समान दुनिया को प्यार करने वाली रजनी अजीत सिंह

जिंदगी में याद आता है। 


तुम्हारे बातों में हमसे छुपी नाराजगी मुझे बहुत याद आता है।
कुछ हक न होकर भी हक जता जाना मुझे बहुत याद आता है।
अपना न होकर भी अपनापन का एहसास दिला फिर तेरा बिछड़ जाना मुझे बहुत तड़पता है।
कभी जब फिक्र होती है तो मन कहता है थोड़ा बातें करूं।
पर बातों का सही वजह न मिल पाना मन को बहुत तकलीफ देता है।
रजनी अजीत सिंह 28.12.17
#नाराजगी
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