महीना: मार्च 2018

जिंदगी में शिकायत भी नहीं।

जिंदगी तुझसे शिकायत ही नहीं है।
जिंदगी के सफर में कितनी बार टूट के विखरे।
पर जिंदगी ने ही हमें टूटने के बाद भी जिना सीखाया।
जिंदगी के तजुर्बा ने ही सब समझने के बाद भी नजर अंदाज कर नासमझ बन माफ करने की कला सीखाया और रिश्तों को अपने हिसाब से निभाना सीखाया।
नहीं तो कभी वो भी समय था जब शेरनी और क्षत्राणी कहलाती थी क्योंकि क्षत्रिय कुल में जन्मी जो थी एक नजर पीछे मुड़कर घूर देने मात्र से छक्के छूट जाते थे और सब अपने अपने रास्ते पकड़ लेते थे।
पर आज बस तजुर्बा है कि प्यार से समझाने की कोशिश कर मुस्कुराकर बातों को टाल अपनी बात, बातों बातों में समझा ले जाती हूँ और रिश्तों को बड़े प्यार से निभाने लगी हूँ। सुना जाता है क्षत्रिय अपना बदला बारह बरस बाद भी बदला लेते हैं और मैं ठहरी क्षत्राणी जिसके पिता ने 10 साल की उम्र में हाथ में बन्दूक पकड़ा दी क्यों कि मैं फौजी की बेटी थी जिस उम्र में आजकल नैनो से शिकार करते हैं हम उस उम्र में नील गाय, सांप, बगुले अर्थात पशु पक्षी को एक गोली से दो शिकार करते थे।कहीं डकैती होती थी वही डकैत जब हमारे निशाने के शोर से अब चोरों की तरह ढंग से चोरी भी नहीं कर पाते थे। और आज अब कब इतने बड़े हो गए कि बिन कुछ कहे सब जानते हुए भी अनजान बन रिश्तों को प्यार से निभाने की कोशिश करने लगे।
रजनी अजीत सिंह 31.3.18
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जिंदगी में झूठ सच का एहसास।

हमने सोचा था मेरे प्यार के एहसास और सच्चाई में इतनी ताकत होगी कि तेरी झूठ बोलने की आदत छूट जायेगी। माना की मैं नासमझ हूँ तेरे जितनी समझ नहीं मुझमें की हर झूठ को सच बना के ब्यां करूं। पर इतनी समझ तो है ही कि तू जब झूठ बोलता है तो पहचान सकू की तू झूठ क्यों बोलता है। कुछ बातों को नजरअंदाज कर देने का मतलब ये तो नहीं कि सामने वाला कुछ समझता ही नहीं समझता है पर रिश्तों को निभाना एक कला है बस उसी कला का उपयोग कर हर रिश्ता निभाया है हमने और आगे भी निभाती रहूँगी।
हर रिश्ते में प्यार है उसे ढूंढो तो सही, छोटी सी उम्र है अभी दुनिया देखा ही कितना है। कुछ बातें तजुर्बा सीखा देते हैं जो किताबों में पढ़ने से हम कभी नहीं सीख पाते हैं वो केवल अनुभव सीखा देता है।
कुछ तो है जो मैं समझ के भी न समझ पायी पर हर मोड़ पर समझने की कोशिश की। जब माँ बच्चों से रूठकर बोलना छोड़ दे तो वह कलेजे पर पत्थर रख लेती है क्यों? क्यों कि उसी में उसकी भलाई है।
मेरे और तुम्हारे रिश्तों में सागर से भी गहरा प्यार है उसे तभी समझोगे जब गोता लगाओगे अर्थात समझना चाहोगे।
अन्यथा एक नदी के दो किनारे जो बस
सूख ही सकते हैं अर्थात टूट सकते हैं। लेकिन मेरा एहसास कहता है क्यों न हम वो लहर बने जो एक किनारे को छू के दूसरे तक पंहुचती है और हमेशा अपने ही मौज में रहती है। और मैं वही लहर हूँ जो दोनों किनारों से कुछ कहना चाहती हूं कि लहरों को मौज में ही रहने दो उसे तुफान मत बनने दो वर्ना सब कुछ तहस नहस हो जाएगा जिसे बर्बाद होना कहते हैं। अबाद और बर्बाद के शब्दों को पढ़ा ही होगा उसे महसूस नहीं किया होगा यदि प्यार को महसूस किया होता तो सबकी खुशी के लिए जिंदगी अबाद किया होता बर्बाद नहीं।
रजनी अजीत सिंह
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जिंदगी में सतरंगी सपने।

मेरे अपने सतरंगी सपने कभी अपने नहीं हुए, ये सतरंगी सपने तो सपने है, लेकिन यहाँ अपने भी,कभी अपने नहीं हुए।
जागते लोग भी देख लेते हैं सपने, नींद में देखने की बात ही निराली है।
सतरंगी सपने की बात करें तो कोई बेगाना होकर भी अपना लगता है, कोई अपना होकर भी बेगाना लगता है। कोई बेवफा होकर भी वफा की तलाश करता है, कोई वफा करके भी बेवफा बन जाता है।
ये सतरंगी सपने हैं इसके रंग भी अजूबे है, सपने कभी किसी के जिंदगी में खुशी की दस्तक देती है, तो वो सब कुछ गंवाकर मरना चाहता है।
सपने में क्या कहूँ हकीकत में भी कभी किसी को मौत ने लाखो बार मारना चाहा है, तो भी वह सब कुछ भुलाकर, खुशी बांटकर जीना चाहता है।
सपने कैसे? कैसे सतरंगी सपने, सपने क्यों दिखते है? आप किसके लिए खुली आँखों से सपने देखते हैं? इसका वर्णन करना ही मुझे मुश्किल लगता है। कहीं सपने किसी की जिंदगी अबाद करते हैं और कहीं न चाहकर भी किसी की जिंदगी बर्बाद कर देते हैं।
मेरी लेखनी शब्दों का एहसास कर स्वछंद मष्तिष्क में सतरंगी सपने बुनती है और उसी सपनों की दुनिया विचरण करती है।
रजनी अजीत सिंह 30.3.18

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जिंदगी में एहसास।

जिंदगी लूटती है तो लूट जाने दो।
सांसे रुकती है तो रूक जाने दो।
चार दिन की जिंदगी है तेरे प्यार के एहसास से घड़ी भर खुशी मिलती है तो मिल जाने दो।
आँखों में आँसू हो,उसकी वजह भी तुम हो।
होठों पर हँसी हो, उसकी वजह भी तुम हो।
कहीं किसी रोज अचानक सांसे थम जायेगी मुस्कुराते हुए उस आखिरी ओठों की मुस्कान की वजह भी तुम ही होगे।
और जब यह एहसास होगा कि मैं दुनिया में अब नहीं रही तो बस आँखें नम होगी और चाहकर भी ओठ कभी नहीं मुस्कुरायेगें।
रजनी अजीत सिंह 28.3.18
#जिंदगी
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जिंदगी में कुछ लोग।

संबंधों की केमिस्ट्री भी ना बहुत अजीब होती हैI हम कैसे कैसे लोगों से निर्वाह करते हैं अगर सोचने बैठें तो हँसी आने लगे ख़ुद परI

YQ Didi के साथ collab करेंI अपने विचारों को मुक्तक, कविता, कहानी अथवा संस्मरण के माध्यम से प्रस्तुत करेंI

शुभकामनाएँI
#कुछ_लोग #collab_yqdidi
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कुछ लोग, दिखावे में कभी साथ भले न दें।
पर जरूरत पड़ने पर हमेशा साथ देते हैं।
वो अपने होते हैं जो दुःख में साथ कभी नहीं छोड़ते।
रजनी अजीत सिंह 28.3.18

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जिंदगी में शब्दकोश और जीवन रेखा।

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मेरे मन के शब्दकोश में अनेक शब्द हैं,
जो लेखनी के माध्यम से स्वछंद गगन में उड़ना चाहते हैं।

भले हो पर हौसले बुलंद हो और कुछ कर गुजरने की चाहत हो तो जीवन रेखा छोटी होकर भी बढ़ जाती है।
रजनी अजीत सिंह 28.3.18

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जिंदगी में रिश्तों के एहसास।

मुझे समझ नहीं आया कि रिश्तों को निभाने वाले इस कदर बातों को क्यों टाल जाते हैं।
जैसे कभी कुछ कहा ही न हो, कुछ सोचा ही न हो हमारे रिश्तों को लेकर,
तुम्हारे इस मनमानी करने की आदत से हम अन्दर ही अन्दर टूट जाते हैं।
और जिंदगी में खुशी से जीने की चाहत में हम असक्षम हो जाते हैं।
कैसे बताऊँ कि तुम्हारा प्यार रुपी एहसास के दो शब्दों से हम फूलों से खिल जाते हैं।
जब तुम खामोशी के साथ उदास हो जाते हो तो तुम्हारा पता न पाने से हम मुरझा से जाते हैं।
रजनी अजीत सिंह 26.3.18
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जिंदगी में रास्ते।

रास्ते अक्सर हमें उलझा कर रखते हैं। मगर किया क्या जाए कि इस उलझन का भी अपना मज़ा है। एक लेखक हर अवस्था में आनंदित रहता है।

प्रिय लेखको, कोलैब कीजिये YQDidi के साथ।
#ये_रास्ते #yqdidi #yqbaba #collab_yqdidi

शुभकामनाएँ।
#YourQuoteAndMine
Collaborating with YourQuote Didiजब रास्ते के रोड़े हट जाते हैं तो कामयाबी के रास्ते खुलते हैं।
जहाँ चार रास्ते मिलते हैं उसे चौराहा कहते हैं।
सफलता पाने के लिए एक रास्ते को चुनते हैं तो सफल होने के रास्ते खुलते हैं।
जिंदगी में सच और दया का भाव रखते हैं तो यश और कीर्ति के रास्ते खुलते हैं।
रजनी अजीत सिंह 26.3.18

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बिल्ली मौसी की बोलियों के विचार।

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#बालसाहित्य

नमस्ते।

हिन्दी साहित्य में बाल साहित्य की परम्परा बहुत समृद्ध है।
बड़े बड़े लेखकों जैसे मुंशी प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना इत्यादि ने प्रचुर मात्रा में बाल साहित्य की रचना की।

बाल साहित्य के अन्तर्गत वह शिक्षाप्रद साहित्य आता है जिसका लेखन बच्चों के मानसिक स्तर को ध्यान में रखकर किया गया हो। बाल साहित्य में रोचक शिक्षाप्रद बाल-कहानियाँ, बाल गीत व कविताएँ प्रमुख हैं।

सम्भवतः यौरकोट परिवार में भी ऐसे लेखक बहुतायत में होंगे जो बाल साहित्य में रुचि रखते हैं। न भी हो तो भी बतौर लेखक इस तरफ़ क़दम बढ़ाया जा सकता है। रचनाशीलता में विविधता हमारी लेखनी के लिए अतिआवश्यक है।

शुभकामनाएँ। #YourQuoteAndMine
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बिल्ली मौसी कुछ कहना चाहती हैं।
अपने बच्चों को सात घर घुमाना चाहती हैं।
घूमा घूमा के सात घर अपने बच्चों को भी
अपनी तरह घर घर की बिल्ली मौसी बनाना चाहती हैं।
जैसे तरु पर पक्षी चहचहाते हैं, वैसे ही अपने म्याउं म्याउं की अवाज से रिझाना चाहती हैं।
कुछ अनहोनी होने वाला है तो रास्ता काट वो बताना चाहती हैं।
जब कुछ अनहोनी हो जाता है तो रो रो सूचना देना चाहती हैं।
घर घर की मौसी हैं तभी तो बाल काव्य और मुहावरा में जगह पा चुकी हैं और आगे ज्यादा जगह पाना चाहती हैं।
सौ चूहे खाकर बिल्ली मौंसी हज को चली, इससे भी कुछ सीखाना चाहती हैं।
समाज में अपना पेट भरना है तो आँख बंद कर दूध मलाई खाओ आँख बंद कर लेने से कोई देखेगा नहीं इस भ़म में वो जीना चाहती हैं।
और न जाने कितने मुहावरा है इन पर आप सुनाना चाहती हैं क्या आप बिल्ली मौसी को जानना चाहोगे तो ये अपने नाम से जुड़े हर किस्सा कहानी सुनाना चाहती हैं।
रजनी अजीत सिंह 25.3.18
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जिंदगी में, कलयुग में भगवान् कल्कि की कल्पना।

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Collaborating with Anuup Kamal Agrawal
हर युग में अवतार हुआ है झलक मिला भगवान् का।
कल्कि का अवतार होगा कलयुग के इस राज में।

रजनी अजीत सिंह 25.3.18
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#कलयुग
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#झलक

Collaborating with Rajni Singh
Collaborating with Anuup Kamal Agrawal
कर्मो का सब फल मिला है राम हो या रावण।
खत्म होगा श्राप तो फिर बसेगा संसार और परिवार जिसमें होगा प्यार ही प्यार।
रजनी अजीत सिंह 25.3.18

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