Month: मार्च 2019

आँखों में समंदर सा गहराई

इन आँखों में मत देखो झांककर समुदर से भी अधिक गहराई है कभी खुशी है तो कभी गम है।
हर रिस्तों को निभाने का हुनर पाया है अपनी माँ से।
इसे समझौता नहीं प्यार कहते हैं इश्क की लहरों को भी महसूस करते हैं पर हम सागर की सुता हैं बड़े प्यार से हर रिस्तों को निभा हर इश्क की लहरों को बहुत करीब से महसूस कर समुद्र की गहराई में अपने आप में समाहित करने का हुनर रखते हैं।
वर्ना समुद्र मंथन में लक्ष्मी विष्णु की प्रिया बन साथ न होती।
पत्नी पतिबरता बन जब तन मन धन से पूर्ण रूप से समर्पित हो शंकर पार्वती सा सृष्टि का संचालन न करती। कृष्ण की प्रेमिका बन राधा का नाम राधे श्याम, राधेकृष्ण अमर न होता। और प्रेमिका तब बनती है जब सबकुछ त्याग कर वियोगा अवस्था के हद को पार कर जाती है पर संयोगा अवस्था की कल्पना तक नहीं करती सच्चे मायने में यही इश्क, मोहब्बत, और प्यार है साहब मेरे हिसाब से जो कई घरों को आबाद कर दे।
इश्क वो नहीं जो ब्रह्मा सा मानस पुत्री से ही हो जाय और भगवान होते हुये भी पूजा का अधिकार न पाए।
हम तो तुलसी सा बन सदियों सदियों तक अपने प्रेम में पगे भगवान का इंतजार करेंगे और धीरज, धर्म का निर्वहन कर अपने भगवान की प्रेमिका बन मिशाल बनेगें।
रजनी अजीत सिंह 24.3.2019
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#प्यार
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#प्रेमिका

आँखों में नमी

किसी को समय दिया, किसी को प्यार दिया।
किसी को हर खुशी दे दी।
मेरे हिस्से में हर जगह व्यस्तता भरी जिंदगी थी जो मेरी आँखों में नमी दे दी।
रजनी अजीत सिंह 23.3.2019

छांव की तलाश

मैं छांव की तलाश में थी, अंतर्मन से जो माना था।
उससे भी उतना ही प्यार मिलेगा इस विश्वास के साथ जी रही थी।
पर तकदीर देखिये ना साहब, मैं विष से भरा वो विषपात्र हूँ जिसके हिस्से में ठोकरें, छल, और फरेब रुपी विष ही किस्मत में लिखा था।
जिसे न चाहकर भी घूंट घूंट पी रही थी जिसका असर होगा या मीरा की तरह बेअसर होगा इसके परवाह किये बिना पी रही थी।
रजनी अजीत सिंह 23.3.2019
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जिदंगी के रंग होली के संग

जिदंगी हमें कितने रंग दिखाती है।

जैसे होली सब रंगों को लेकर आती है।

कहीं सरसों के फूल बसंत ऋतु की खूबसूरती लेकर आती है।
तो कहीं खेतों में गेहूं की बालियां हम को लुभाती है।
प्रकृति की छटा भी कितनी निराली लगती है।
हर रंग के फूल हमें होली के रंगों सी लगती है।
कहीं फगुनहटा ब्यार तो कहीं होली के गीत भी हमारे मन को भाती है।
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत दिलाती है।
होली विभिन्न पकवानों के साथ ढ़ेर सारी खुशियाँ लेकर आती है।
क्या बच्चे क्या बूढ़े क्या जवान सब टोली में मिल आपस में खुशियां मनाते है।
हर रंग हमें अलग अलग महत्व लिए अपने अर्थो से जिंदगी के रंग से अवगत कराती है।
1.लाल रंग प्यार का रंग है। ये रंग हमें प्यार करना सीखाती है। इस लिए लोग प्यार में लाल गुलाब देना पंसद करते हैं।
ऐसा माना जाता है की मां दुर्गा लाल रंग की ओढ़ चुन्नी जग में उपकार करती है।

2.पीला रंग दोस्ती के लिए खास रंग है। इसलिए दोस्ती में लोग पीला गुलाब देना पंसद करते हैं।
और ऐसा माना जाता है मां शीतला पीला चुनरी पहनती है तो जग में कल्याण करती हैं।
3.गुलबी रंग जिसे रानियों का कलर कहा गया है।
और जब माँ लक्ष्मी गुलाबी चुन्नी पहनती हैं तो लक्ष्मी का रूप धारण कर धन दान करती हैं।
4.श्वेत अर्थात सफेद ये रंग अपने आप में पवित्रता को लिए हुए है। ये रंग अपना अस्तित्व छोड़कर किसी भी रंग में रंग जाता है। अर्थात इस रंग को प्यार से चाहे जिस रंग में रंग लो। जैसे हमारे तिरंगे में इस रंग को शांति, सत्य और पवित्रता का चिन्ह माना गया है।
जब माँ श्वेत चुनरीओढ़ सरस्वती का रूप धारण करतीं हैं तो जगत में ज्ञान बांटती है अर्थात विद्या दान करती हैं।
5.हरा रंग प्रकृति को दर्शाने वाला रंग है। जिसे देख मन अपने आप में प्रसन्न और प्रफुल्लित हो जाता है।
इस हरे रंग को तिरंगे में श्रद्धा, विश्वास और देश की हरियाली और समवृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
6.केसरिया अर्थात आरेंज रंग वीरता और त्याग का सूचक है।
7.काला रंग हम हिन्दुओं में किसी भी शुभ कार्य में वर्जित है। वहीं मुस्लिम धर्म के लोग शुभ मानते हैं। काला रंग कलंक लगने के अर्थ में भी किया गया है। तो वहीं दूसरी तरफ यही काला रंग आँखों में लग खूबसूरती भी प्रदान करता है और काला टीका लगाकर बुरी नजर से भी बचाया जाता है।
जब काली माँ संघार करने चलती हैं तो काला चुनरी अर्थात काला वस्त्र धारण कर दुष्टों का रक्त पान करती हैं।
जब सातों रंग साथ हो तो इसे इन्द्रधनुष कहते हैं।

जब माँ सातों रंग की चुनरी धारण करती हैं तो इनकी माया कोई नहीं समझ पाता है अर्थात इनकी माया इनकी सात बहनें भी नहीं समझ पाती हैं। और जब इनकी कृपा हो जाय तो अज्ञानी एक पल में ज्ञानी बन जाता है।
जब लिख रही थी तो लगा क्यों न हम इन रंगों के अस्तित्व को अपनाकर होली के रंगों के साथ खुशियां मनाएँ।
होली के रंगों के साथ सभी बड़े और छोटे को होली मुबारक हो।होली के शुभ रंगों के साथ आपलोगों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं

रजनी सिंह 19.2019

हाले दिल

कभी फुर्सत हो काम से तो हाले दिल सुनाते।
जिंदगी तो बीत रही व्यस्तता में, फिर किसी ने पूछा भी नहीं जो अपनी व्यथा सुनाते।
जिंदगी तो निकल गई सबको खुश रखने की कोशिश में फिर भी सब खुश न हुआ तो कैसे रिस्तों को निभाते।
हमारी खैरियत इसी में थी की सब कुछ देखकर बस मौन ही रह जाते।
पर ये रिश्तों की निभाने की चाहत मौन रहकर भी बहुत कुछ कह जाते।
रजनी अजीत सिंह 18.3.2019

संगठन में खुबसूरती

टमाटर की खूबसूरती गुच्छे में होने से ज्यादा बढ़ गया है रिश्तें और दोस्ती भी गुच्छे यानी समूह में ही खूबसूरत लगते हैं। एक एक कर रिस्ते निभाने में रिस्ते या कोई दोस्त कब अकेला पड़ जाता है इसका अभास भी नहीं होता।
और जब अभास होता है तब तक बहुत देर हो जाता है।
रजनी अजीत सिंह 18.3.2019

जिदंगी में ऊँचा उठो

जिदंगी में इतने ऊँचे उठो कि दुनिया मरने के बाद भी याद करे।

देखो सारे रिस्तों को एक दृष्टि से, सींचित करो समता की भाव दृष्टि से।

जाति, धर्म, वेश की, काले – गोरे रंग अपने पराये के भेद की ज्वालाओं से जलते दुनियां में इतना शीतल बनो कि जितना मलय पवन है।

हर रिस्तों में इतना प्यार भर दो कि वर्तमान के साथ भविष्य भी सवांर लो।

अपनी लेखनी से ऐसा कुछ लिख जाओ कि नये रिस्तों के साथ पुराने रिस्तों में भी नूतन स्वर भर दो।

अपने शब्दों से जीने का वजह दो, हर रिश्तों में प्यार का रंग भर दो।

इतना मौलिक बनो की जितना स्वयं सृजन है।

अतीत से उतना ही याद कर सीख लो जितना जिंदगी जीने के लिए जरूरत हो।

जीर्ण – शीर्ण यादें और घातें मंजिल से कई कदम पीछे ले जाने के कारण है।

तोड़ो हर बंधन रुके न चिंतन गति, हर रिस्तों का सत्य चिरंतन धारा के शाश्वत प्रवाह में इतने दयावान बनों की जितना परिवर्तन है।

चाहत बस इतनी हर नर्क बने घर को स्वर्ग बनाना। अगर कहीं हो स्वर्ग उसे हर घर में लाना।

सूरज, चाँद, चाँदनी और तारे सब हैं साक्षी बन साथ हमारे।

हर कुरुप को दो रुप सलोना, ह्रदय से इतना सुंदर बने जितना सब पर आकर्षण पड़ती भारी है।

यही तो बात है रजनी का मन सब पर वारी है।

रजनी अजीत सिंह 7.3.2019

कुछ अपने एहसास

कांटो में गुलाब मुस्कुराता है।
कीचड़ में कमल खिलता है।
नफरतों में भी जहाँ प्यार हो,
प्रेम फूल वहाँ ही उपजता है।
जिसकी सुगंध कस्तूरी सा है,
ढूंढने से नहीं मिलता है,
वह तो अपने एहसास में है।
जो एहसास करने मात्र से ही
सुगंध बन जिंदगी की बगिया में,
खुश्बू बन हर दिलों में बस जाता है।

रजनी अजीत सिंह 16.2.2019

मेरे पास हो तुम

मेरे मन के बहुत पास हो तुम।
मेरे अनकहे हर शब्दों में हो तुम,

मेरे ख्वाबों – ख्यालों में हो तुम,
मेरे हर शब्दों के जज्बातों में हो तुम,
मेरे मन के बहुत पास हो तुम।
सारे सवालों के जवाब हो तुम,
मेरी रूह की अवाज हो तुम,
मेरी जिंदगी के खुशी के आगाज हो तुम,
मेरे मन के बहुत पास हो तुम।
मेरी हर बात को बिन कहे समझने वाले हो तुम,
मेरे आँखों से बहते आँसुओं के रूक जाने के सबब हो तुम,
मेरे प्यार के अनकहे अल्फाज़ हो तुम,
मेरे मन के बहुत पास हो तुम।
मेरे अकेलेपन का सहारा हो तुम,
मेरे हर दर्द का दवा हो तुम,
मेरे हर मर्ज का इलाज हो तुम,
मेरे मन के बहुत पास हो तुम।
जो शब्दों से ब्यां न कर सकूं,
जिस चाहत ने इतनों के भीड़ में अपना दिया,
उस अमीट प्यार के एहसास हो तुम,
मेरे मन के बहुत पास हो तुम।
रजनी अजीत सिंह 9.12.2018