परिभाषित

तुम मेरे हर रिस्तों को परिभाषित करने की कड़ी हो।
भावों से परिपूर्ण वह जादू की छड़ी हो।
जो मिल जाता है तो हजारों तार सज के जलजाते हैं,
वो खुशियों की तुम लड़ी हो।
जब करूणा का सार उमड़ता है तो तुम वहाँ फूलझड़ी हो।
स्पंदित हो हर एक के जीवन में प्राण फूंक देने के लिए,
तुम्हारी जिंदगी जैसे खड़ी हो।
तुम हमारे हर रिश्तों को परिभाषित करने की कड़ी हो।
जहाँ तुम बस्ते हो, हाँ तुम्हारी रात को वहीं खुशी मिलती है,
तभी तो तेरी रात चाँद तारो से जड़ी है,
तभी तो तुम रात की खुशियों की घड़ी हो।
तुम हमारे हर रिस्तों को परिभाषित करने की कड़ी हो।
तुम खुश रहो तो तुम्हारी रात जागकर कभी सोकर तेरी जिंदगी में,
खुशियों के खातिर जैसे हर वक्त तेरे गले पड़ी हो।
तुम मेरे हर रिस्तों को परिभाषित करने की कड़ी हो।
रजनी अजीत सिंह 22,4.2019
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पतझड़ का मौसम जान सखी

पतझड़ का मौसम आया सखी, जो पुरातन पत्तों को झाड़ गया।
पर आस लगी फिर भी तरु की, जीवन डाली को थाम सखी,
पतझड़ का मौसम जान सखी।
पुरातन पत्ते टूट गये, मरकत के साथी छूट गये।
अटके विश्वास के तरु पर दो प्रीत पात,तुफानी पवन से लड़ करके,
जीवन डाली को थाम सखी, पतझड़ का मौसम जान सखी।
लुक छिपकर आयेंगी बहार सखी, तरु पर पल्लव भी आयेगा।
फल फूल सभी लग जायेगा, बदलते ऋतु के साथ,
मौसम भी बदल जायेगा।
प्रकृति के नियमों को जान, समय की यही है माँग सखी।
बसंत ऋतु फिर आयेगी, कू कू कोयल गायेगी,
फिर मधुर गीत सुनायेगी, जीवन में खुशियाँ छायेंगी।
पतझड़ का मौसम जान सखी, जीवन डाली को थाम सखी।
रजनी अजीत सिंह 9.9.2019

जिंदगी की हर खुशी लुटा आयी हूँ।

जिंदगी की हर खुशी तुझ पर लुटा आयी हूँ।
अपनी हस्ती को भी मिटा प्यार से सबको गले लगा आयी हूँ।
उम्र भर की जो कमाई थी इज्जत की दौलत, वो अपने कुटुम्ब पर लुटा आयी हूँ।
आज शब्दों से जो लेखनी चलायी, आँखों में गंगा बहा लायी हूँ, आग बहते हुए पानी में लगा आयी हूँ।
तूने कहा था क्या? हटा दूँ मैं वो डरावनी यादें, तूने चाहा था भूला दूँ मन में बसी उनकी मेरे प्रति नफरतें।
हाँ बदल डाला मैंने कितनों की तदवीरें, पर नहीं बदल सकती उनकी तकदीरें।
आज शब्दों से जो कागज पर लेखनी चलायी,
तो आँखों में गंगा बहा लायी हूँ, आग बहते हुए पानी में लगा आयी हूँ।
तेरे खूशबू से बसा मेरा जीवन उसे मैं भुलाती कैसे?
दुःख में भी खिलाया जो अपने हाथों से निवाला, उस प्यार के मिठास को झुठलाती कैसे?
मुझे जो हमेशा मेरे रिश्ते में देते रहे गाली उसके मन में छुपी नफरतों को नकारती कैसे?
आज जो शब्दों से कागज पर लेखनी चलायी है, तो आँखों में गंगा बहा लायी हूँ ।
आग बहते हुए पानी में लगा आयी हूँ।
जिस प्यार को दुनिया से छुपाये रखा, उसे ताउम्र गले से लगाए रखा।
उनकी नफरत भरी निगाहें, मुँख से निकले बद्दुआंऔर तानों के बीच भी अपना इमान बनाये रखा।
जिनका हर लफ्ज़ चुभा है दिल में शूलों की तरह, वो याद है मुझे पैगाम-ए-जबानी की तरह।
मुझे जो प्यारे थे जी जान की तरह, तुझे दुनियां के निगाहों में बसने के लिए जो लिखे थे नज्म।
पास रहकर भी साल-हा-साल लिखे थे तेरे नाम के खत, कभी दिन में तो कभी रात को उठकर लिखे थे।
तेरे प्यार गये, तेरे खत भी गये, तेरी यादें भी गयी, तेरी तस्वीरें भी गयी, तेरे लिफाफे भी गये।
एक युग खत्म हुआ, स्याही से लिखने के फसानें भी गये, सोसल प्लेटफॉर्म पर मैसेज कर लाइक कमेन्ट के चलन भी आ गये, पर तेरा प्यार न लिख पाये इस जहाँ में।
आज शब्दों से जो कागज पर लेखनी चलाई, तो आँखों में गंगा बहा लायी हूँ, आग बहते हुए पानी में लगा आयी हूँ।
कितना बेचैन था नैनो का नीर, आँखों से बहने के खातिर, जो भी अश्रुधारा बहा था वो उन्हीं के लिए बहनें को बेकल था।
प्यार अपना भी तो गंगा की तरह निर्मल था, तभी तो तन्हाई में भी मिलन की खुशियाँ दिल में उतर आयी थी।
आज शब्दों से जो कागज पर लेखनी चलायी, तो आँखों में गंगा बहा लायी हूँ, आग बहते हुए पानी में लगा आयी हूँ।
रजनी अजीत सिंह 6.7.2019

शब्दों के सफर का लोकार्पण

हृदय की अनुभूतियों का भावमय प्रकाशन ही काव्य है

रजनी अजीत सिंह की काव्य कृति ‘शब्दों का सफर ‘ का लोकार्पण

वास्तव में काव्य की आत्मा रस ही है इसलिए कहा गया है ‘ रसात्मकं वाक्यं काव्ययम्।हृदय की अनुभूतियों का प्रकाशन ही काव्य है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसी आत्मा की मुक्ताअवस्था को रस दशा कहा है। रस हृदय की मुक्ति साधना के लिए मनुष्य की वाणी जो शब्द विधान करती आयी है उसे ही कविता कहते हैं। रजनी अजीत सिंह जी की कविता भाव प्रधान है एवं प्रभाव शाली है जो इसमें त्रुटि निकालते हैं उसे मुख्य अतिथि डा०राम वचन सिंह जी ने रामायण के एक प्रसंग के माध्यम से समझाया उन्होने कहा कि जब लंका विजय कर सीता जी को पालकी में बैठाकर लाया जा रहा था तो वानर समूह उन्हें देखने के लिये लालायित थे और देख नहीं पा रहे थे तो राम जी ने पालकी से उतारकर पैदल ही लाने का आदेश दिया ताकि सब वानर समूह आसानी से देख सकें। एक वानर ने कहा कि सीता जी बहुत सुंदर हैं तो उसके जवाब में दूसरे वानर ने कहा सीता जी सुंदर तो हैं पर एक कमी है उनकी पूँछ नहीं है। तो यदि पाठक वानर की तरह पूँछ खोजने लगे तो यह उसकी समझ है।

बनारस के सुप्रसिद्ध हास्य कवि ‘दमदार बनारसी जी ने इस पुस्तक विमोचन में अपनी बात रखते हुए कहा कि “शायर जब रात और दिन जलता है तब जहन के पर्दे पर एक शेर उभरता है।”

डा०रामसुधार जी ने “शब्दों का सफर” पुस्तक की समीक्षा करते हुए कहा कि कविताओं में कवयित्री ने भावनाओं के कई रंग विखेरे हैं। वह अपने दर्द और दुःखों को स्वयं सहते हुए भी दूसरे के लिए मुस्कुराना चाहती हैं। वह रिस्तों को बचाने के लिए उनके बीच में विश्वास का होना आवश्यक मानतीं हैं। आज के भागमभाग के जिंदगी में मनुष्य के पास सबकुछ है किन्तु आनन्द नहीं है। यह समीक्षा पुस्तक में संकलित भी है। इस कार्यक्रम में बनारस में जाम लगने के समस्या के कारण हिमांशु उपाध्याय जी कार्य के समापन के बाद उपस्थित हुए जिसके कारण अपने शब्दों से आशीष न दे सके इसका रजनी अजीत सिंह को बहुत खेद है।

मंच का संचालन कर रहे आशुतोष प्रसिद्ध जी की कविताएँ भी इस पुस्तक में शामिल हैं।

रजनी अजीत सिंह की सखी पींकी चतुर्वेदी जी ने कहा कि इतनी कम उम्र में इतनी गहराई लिखना बहुत बड़ी विचार पूर्णता को दर्शाता है। “शब्दों के सफर” कविता संग्रह में पींकी जी को”हर हाल का जिक्र मन करने को कहता है”। आशुतोष तिवारी जी की रचना “कमजोर कौन” स्त्रियों को कमजोर समझने वाले समाज की मानसिकता पर प्रहार है “। मन को छू लिया और उन्होंने यह भी कहा ‘शब्दों से शब्दातीत होने की यात्रा में जीवन प्रतिपल नया है।

समस्त कार्यक्रम तिरुपति इनक्लेव डुपलेक्स के पार्टी हाॅल शिवपुर रोटी ढाबा के सामने में सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में एस. पी सुरक्षा सुकीर्ति माधव मिश्रा जी की पत्नी किरन मिश्रा जी ने भी पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर श्री अजीत सिंह ने भी हास्यात्म लहजे में अपने विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन “शब्दों का सफर” पुस्तक के दूसरे कवि आशुतोष तिवारी ने तथा धन्यवाद समापन रजनी अजीत सिंह ने किया।

3.2.2020

रजनी अजीत सिंह की काव्य कृति ‘शब्दों का सफर ‘ का लोकार्पण वाराणसी। रजनी अजीत सिंह की कार्य कृति शब्दो का सफर का लोकार्पण

ह्रदय की अनुभूतियों का भावमय प्रकाशन ही काव्य है-डा. रामवचन सिंह

ह्रदय की अनुभूतियों का भावमय प्रकाशन ही काव्य है-डा. रामवचन सिंह

कुछ यादें कुछ बातें

मैं तुम्हें भूलाकर सम्हलना भी चाहूँ तो नहीं सम्हल सकती।
तुमने हर बार की तरह मुझे कुछ कहा होता तो कोई गम न होता पर तुमने तो मेरे एहसास को ही रौंद डाला जो जज्बात और एहसास मेरे रुह से जुड़ा था उसे भी शर्मसार कर दिया।
जिंदगी में सबसे ज्यादा गुरुर था तुम पर, पर वही गुरुर कभी न भरने वाला जख्म दे कभी चाहकर भी न सम्हलने का इनाम दे दिया।
जो किसी से न कहा वो भी शेयर किया तुझसे दोस्त समझर कितने रिश्तों का एहसास पाया था तुझसे रुह की गहराइयों से।
पर तुम्हे तोड़ते वक्त किसी रिस्तों का ख्याल न आया क्यों? क्यों कि तुमने मेरे रिश्ते को रुह की गहराइयों से नहीं चाहा था।
मैं तो तेरे शब्दों से ” Aapko sirf apni chinta hai..sirf khud ka sochna hai” आहत थोड़ा नराज होने का अभ्यास कर रही थी कि मुझे तू मना लेगा मेरी तरह कभी न कभी ,ये विश्वास था या भ्रम ये मुझे आज भी पता नहीं पर मनाना तो दूर सब कुछ तोड़कर कभी न भूलाने वाला रिश्तों का सम्बोधन उपहार में दे गया ” भाई” ।
तुमने तो बस So good bye didi कहकर चल दिया पर तुझे नहीं पता है कि हमने तो अपने जिंदगी में खुश रहने के एहसास को ही अलविदा कह दिया है क्योंकि इन रिश्ते का एहसास कभी किसी और के लिए नहीं जगा पाऊंगी, शायद जिंदगी में कभी भी नहीं, शायद क्या? पक्का कभी भी नहीं, इस जीते जिंदगी तो कभी भी नहीं, कभी भी नहीं मेरे “बटे”मेरे “भाई ” मेरे “दोस्त” कभी भी नहीं।
रजनी अजीत सिंह 12.11.2019

दीदी का दिल

जुलाई 2016से 2020 के अब तक के रिस्तों के सफर में कहने को तो बहुत कुछ है पर अब मन नहीं होता तुमसे कुछ कहने को।
पर दीदी का दिल नये साल पर मुबारक बाद न दे ये भी टूटे रिस्तों में गवांरा नहीं हमको।
नये साल की हार्दिक शुभकामनाएं तुमको,
हर खुशी हो इस साल कदमों में तुम्हारे यही है टूटे दिल की कामना हमारी।
रजनी अजीत सिंह 1.1.20

नये साल की हार्दिक शुभकामनाएं

चमकेंगे हम ऐसे इस साल में,
चमकते हैं जैसे सितारे आसमान में।
लिखना हमें है स्वदेश को अपने कहानी में,
देश को बचाना है अपने आग की लपटों से खून के धब्बों से।
देखो नया साल आ गया कुछ संकल्प ले, कर गुजरने को।
जिंदगी में कुछ अँधेरा कुछ उजाला यह नियति का खेल है।
मिलतीं रहे खुशियाँ सबको हर हाल में,
दो चार बोल प्यार का सबसे मिलता रहे नये साल में।खुशियों के उजालों को लिखूँ मैं शब्दों से,
जैसे जिंदगी के झरोखे से झाँक रहे खुशियों के पल हों।
देखो फिर नया साल आ गया कुछ संकल्प ले, कर गुजरने को।
रजनी अजीत सिंह 1.1.2020
नये साल की नयी उम्मीदों के साथ नये साल की हार्दिक शुभकामनाएं ।
की हार्दिक शुभकामनाएं।

नये साल की नई उम्मीद 

अरे! नये साल में नयी उम्मीदें लेकर आया नया साल।
अरे! सबको बधाई नये साल की, मम्मी – पापा ,भाई-बहना, दीदी-जीजा, चाचा-चाची बेटी-बेटा सबको ही।
अरे! जो साथ रहे हैं उनको भी, जो दूर रहे हैं उनको भी, जो देश में है उनको भी, जो विदेश बसे हैं उनको भी।
अरे! जो दोस्त बने हैं उनको भी, जो बिछड़ गए हैं उनको भी।अरे! सबको बधाई-सबको बधाई मेरी तरफ से सबको बधाई।

रजनी सिंह 1.1. 2017

शब्दों का सफर पब्लिश

बड़े हर्ष के साथ सूचित कर रही हूँ कि मेरी पहली किताब “जिदंगी के एहसास” के बाद

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दूसरी बुक “शब्दों का सफर” भी पब्लिश हो गया है जो कल तक आनलाइन विभिन्न लिंक पर उपलब्ध हो जायेगा।

रजनी अजीत सिंह 18.12.2019

“जिदंगी के एहसास” पुस्तक का विमोचन भाग-1

दिनांक 10. 11.2018 को कवियत्रि रजनी अजीत सिंह के पुस्तक

” जिंदगी के एहसास” का विमोचन विक्रम पैलेस शिवपुर, सेंट्रल जेल रोड वाराणसी से सम्पन्न हुआ।

जिसमें मुख्य अतिथि डा0 राम बचन सिंह जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में हुआ आप बी. एच. यू. से एम. ए. किया और संस्कृत में पी. एच. डी की और आप सूफी साहित्य के प्रोफेसर के रूप में उदय प्रताप कालेज में कार्यरत रहे।

वरिष्ठ अतिथि राम सुधार सिंह आपने उदय प्रताप कालेज के हिंदी विभाग में 1980से 2014तक कार्य किया। आपकी पुस्तकों में नयी कविता की लम्बी कविताएँ, हिंदी साहित्य का इतिहास सामिल है। आप आलोचक, कवि, एंव साहित्यकार हैं।

डा. मधु सिंह आप उदय प्रताप कालेज में हिंदी विभाग की अध्यक्ष हैं। आपका कथा साहित्य मध्यकालीन काव्य से विशेष लगाव है। आप रेडियो एवं आकाशवाणी पर आपके कार्यक्रम आते रहते हैं। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में भी आपके लेख छपते रहते हैं।

मेरे तीनों गुरुओं के उपस्थिति में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। मेरे दो गुरु स्वर्गीय डा. विश्वनाथ सर जो साहित्य के क्षेत्र में बड़े साहित्यकार थे जो हमारे बीच नहीं रहे।एक और गुरु डा. जय नारायण तिवारी थे जिनके घर का पता न होने से उन्हें न बुला सके।

कार्यक्रम आरम्भ होता है अतिथियों का स्वागत बुके और शाल दे सम्मानित किया गया।

और संचालिका ने रजनी अजीत सिंह के स्वागत में कहा – मैं स्वागत करती हूँ उनका जिनकी कलम, जिनके विचारों से आज का दिन ईश्वर ने सृजित किया है।

कवि ये धुन का पक्का है, नया कुछ लेके आया है।

नया झरना ख्यालों का हिमालय से बहाया है।

इरादों की अहद इनकी शिखर तक लेके जायेगी।

ये पुस्तक एक दीपक है हवाओं ने जलाया है।

उसके बाद अतिथियों ने और रजनी अजीत सिंह ने दीप प्रज्वलित कर मां सरस्वती का नमन किया जिस पर संचालिका ने कहा –

अर्चना के पुष्प चरणों में समर्पित कर रहा हूँ,

मन ह्दय से स्वयं को हे मातु अर्पित कर रहा हूँ।

दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का आरम्भ होता है। पुस्तक जिसका शीर्षक है “जिंदगी के एहसास” कविता संग्रह है। इसका प्रकाशन ब्लू रोज पब्लिशर द्वारा हुआ है।बरिष्ठ अतिथियों द्वारा किताब का लोकार्पण हुआ। संचालिका ने कहा –

किसी भी पुस्तक के पीछे उस रचनाकार उस कवि की एक लम्बी यात्रा होती है, एक मानसिक यात्रा होती है। उसके जीवन, उसके एहसास, उसके जीवन की समझ उसके अनुभव शब्दों में पिरोये होते हैं।

कविता संवेदनाओं का प्रतिनिधित्व करती है। कविता किसी एहसास के धरातल पर लिखी होती है। कविता वो है जो कल्पना और वास्तविकता के बीच में जो रिक्त स्थान है उसे पूर्ण करती है और उस निराशा भरे जीवन से अंधकार को दूर करती है। सूरज की रोशनी अंधकार को भागाती है, पर कविता दीये की रौशनी है जो अंधकार में भी उजाला लाती है। समया अभाव के कारण गुरु के आशिर्वाद स्वरूप और प्रोत्साहन भरे शब्दों और अपने शब्दों का विवरण “जिदंगी के एहसास” कविता का विमोचन भाग दो में पढ़ेगें।

रजनी अजीत सिंह 12.11.18

जिदंगी के एहसास पुस्तक को मगांने हेतु लिंक

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