परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। 21.3.17


सबसे पहले मैं ये बता दूँ कि परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। आज जो मैं लिखने जा रही हूँ वो कोई मन गढ़त कहानी नहीं है न ही मेरी कल्पना की उपज है। वल्कि ये 100%सत्य है। 

                     कोशिश 

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। 

चुनौती चुन चुन कर आती है डर जाने से नौका पार नहीं होती। 

जीवन में जो आये लहर तो कूद लहर काटो। 

दुनिया चाहे पीछे पड़ी हो लक्ष्य को तुम साधो। 

लक्ष्य साध जब आते हैं तो दुनिया साथ होती। 

कोशिश करने – – – – – – – – – – – – ।

मंजिल पाना हो तो राही चलते ही जाओ। 

कंकड पत्थर कांटो से तुम हार नहीं जाओ। 

चलते चलते राही को मंजिल मिल ही जाती। 

कोशिश करने – – – – – – – – – – – – ।

                   रजनी सिंह 

अन्त मैं बस इतना ही कहना चाहूंगी कि यदि हर लड़की को मौका दिया जाय तो हर लड़की कुछ न कुछ कर सकती है लेकिन हमारा समाज साथ देने के बजाय टांग खींचने में ज्यादा विश्वास करता है। और हर लड़की को कुछ उपलब्धि हासिल करने के बजाय शादी को ही सबसे बड़ी उपलब्धि मान बैठता है। मां बाप को फर्क भले न पड़े लेकिन समाज को शादी जैसी उपलब्धि दिलाने में, एहसास कराने में, टांग खींचने में समाज का भरपूर योगदान मिलता है। मेरा लिखने का एक मात्र उद्देश्य है समाज को जागरूक करना और उस लड़की या औरत को सहयोग करना जिसके द्वारा हर औरत या लड़की किसी लाइन को चुनकर एक मिसाल कायम करना चाहती हैं। सुना है लेखनी में बहुत शक्ति होती है। शायद मेरी ये लेखनी समाज को जगाने का काम कर जाय और हम जैसे छोटे रचना कारों को भी कुछ उपलब्धि मिल जाय। 

नोट – मैंने अपने कविता में कंकड़, पत्थर और कांटा को समाज में टांग खींचने वालो के ही अर्थ में किया है। माफी चाहूंगी सब ऐसा नहीं करता है लेकिन जो ऐसा करता है उसको मैं कंकड़, पत्थर और कांटे ही समझती हूं। 

अनुमान नहीं, अनुभव की कुछ पंक्तियाँ 

अश्रु  से नहीं मेरी पहचान थी कुछ 

दर्द से परिचय तुम्ही ने तो कराया 

छू दिया तुमने ह्रदय की धड़कनों को 

गीत का अंकुर तुम्ही ने तो उगाया 

मूक मन को स्वर दिए हैं बस तुम्ही ने 

उम्र भर एहसान भूलूगीं नहीं मैं 


मैं न पाती सीख यह भाषा नयन की 

तुम न मिलते उम्र मेरी व्यर्थ होती 

सांस ढ़ोती शव विवश अपना स्वयं ही 

और मेरी जिंदगी किस अर्थ होती 

प्राण को विश्वास सौंपा बस तुम्ही ने 

उम्र भर एहसान भूलूगीं नहीं मैं 


तुम मिले हो क्या मुझे साथी सफर में 

राह से कुछ मोह जैसा हो गया है 

एक सूनापन की जो मन को डसे था 

राह में गिरकर कहीं वह खो गया है 

शोक को उत्सव किया है बस तुम्ही ने 

उम्र भर एहसान भूलूगीं नहीं मैं


यह ह्रदय पाहन बना रहता सदा ही 

सच कहूं यदि जिंदगी में तुम न मिलते

यूं न फिर मधुमास मेरा मित्र होता 

और अधरो पर न यह फिर फूल खिलते 

भग्न मंदिर फिर बनाया बस तुम्ही ने 

उम्र भर एहसान भूलूगीं नहीं मैं 

तीर्थ सा मन कर दिया है बस तुम्हीं ने 

उम्र भर एहसान भूलूगीं नहीं मैं 

  

शिष्य की बड़ी असमर्थता है धन्यबाद देने में। किन शब्दों में बांधे धन्यबाद? क्यों कि शब्द भी गुरु के ही दिये हुए हैं। मूक ही निवेदन हो सकता है। लेकिन फिर भी कहने का कुछ मन होता है। बिन कुछ कहे भी रहा नहीं जाता। 

                       तो एक ही उपाय है कि गुरु की प्रतिध्वनि गूंजे। जो गुरु ने कहा है, शिष्य उसे अपने प्राणों में गुंजाए। जो गुरु ने बजाया है, शिष्य की प्राण – वीणा पर भी बजे। यही धन्यबाद होगा यही अभार होगा। अर्थात जो सुगंध गुरु से मिली है, वह बांट दी जाय। यही एक उपाय है गुरु से उऋण होने का। 


         अनमोल रिश्ते (18.3.17) 

अनमोल रिश्तों को अनमोल ही  रहने दो। 

इसके लिए जीवन में दुःख है तो दुःख सहने दो। 

इन रिश्तों को निभाने में गम या आँसू  मिले तो मिलने दो। 

ध्यान रहे हीरे बहुमूल्य है तो बहुमूल्य रहने दो। 

लेकिन हमारे लिए रिश्ते अनमोल है उसे अनमोल ही रहने दो। 

कच्चे रिश्तों को भी गुणों से गुणवान रत्न में बदलना होगा। 

क्यों कि वह भी तो हमारे लिए अनमोल है। 

अपनो को तकलीफ देने की जरूरत नहीं है। 

अपनो का तकलीफ ले लेने की जरूरत है। 

अनमोल रिश्तों में बस देना ही देना सीखो। 

देना चाहे समय हो चाहे श्रम हो। 

चाहे प्रेम हो चाहे उपदेश चाहे उपहार। 

या कुछ भी हो, इन अनमोल रिश्तों के बीच। 

जीवन का सबसे बड़ा आनंद रजनी के लिए। 

बस  “देना” ही देना है। 

                रजनी सिंह 

अनुमान नहीं, अनुभव “ओशो” 

अनुमान नहीं अनुभव की कुछ पंक्तियाँ लिख रही हूँ –

अगर अकेला होता मैं तो 

शायद कुछ पहले आ जाता 

लेकिन पीछे लगा हुआ था 

संबंधों का लम्बा तांता 

कुछ तो थी जंजीर पांव की 

कुछ रोके था तन का रिश्ता 

कुछ टोके था मन का नाता 

इसीलिए हो गई देर

कर देना माफ विवशता मेरी 

धरती सारी मर जाएगी 

अगर क्षमा निष्काम हो गई 

मैंने तो सोचा था अपनी 

सारी उमर तुझे दे दूंगा 

इतनी दूर मगर थी मंजिल 

चलते – चलते शाम हो गई। 

प्रेम 

अनन्य प्रेम में होना प्रेरणा है। यह ज्ञान को जीवन में उतारने के खातिर विश्वास पैदा करता है। अनन्य प्रेम का प्रत्यक्ष चिन्ह है एक अमिट मुस्कान। 

प्रेम को प्रेम ही रहने दो। उसे कोई नाम न दो। 

जब तुम प्रेम को नाम देते हो, तब वह एक सम्बन्ध बन जाता है, और सम्बन्ध प्रेम को सीमित करता है। 

तुम मेंऔर मुझमें प्रेम है उसे रहने दो। 


जब प्रेम चमकता है, यह सच्चिदानन्द है। 

जब प्रेम बहता है, यह अनुकम्पा है। 

जब प्रेम उफनता है, यह क्रोध है। 

जब प्रेम सुलगता है, यह ईष्र्या है। 

जब प्रेम नकारता है, यह घृणा है। 

जब प्रेम सक्रिय है, यह सम्पूर्ण है। 

जब प्रेम में ज्ञान है, यह “मैं” हूँ। 

जिंदगी  के रंग होली के संग(12.3.17)

जिंदगी हमें  कितना रंग दिखाती है। 
जैसे होली सब रंगों को लेकर आती है। 

कहीं सरसों के फूल बसंत ऋतु  की खूबसूरती लेकर आती है। 

तो कहीं खेतों में गेहूं की बालियां हम को लुभाती है। 

प्रकृति की छटा भी कितनी निराली लगती है। 

हर रंग के फूल हमें होली के रंगों सी लगती है। 

कहीं फगुनहटा ब्यार तो कहीं होली के गीत भी हमारे मन को भाती है। 

होलिका दहन भी  बुराई पर अच्छाई की जीत दिलाती है। 
होली विभिन्न पकवानों के साथ ढ़ेर सारी खुशियाँ लेकर आती है। 

क्या बच्चे क्या बूढ़े क्या जवान सब टोली में मिल आपस में खुशियां मनाते है।   

         हर रंग हमें अलग अलग महत्व लिए अपने अर्थो से जिंदगी के  रंग से  अवगत कराती है। 

1.लाल रंग प्यार का रंग है। ये रंग हमें प्यार करना सीखाती है। इस लिए लोग प्यार में लाल गुलाब देना पंसद करते हैं। 

                   ऐसा माना जाता है की मां दुर्गा लाल रंग की ओढ़ चुन्नी जग में उपकार करती है। 

2.पीला रंग दोस्ती के लिए खास रंग है। इसलिए दोस्ती में लोग पीला गुलाब देना पंसद करते हैं। 

                  और ऐसा माना जाता है मां शीतला पीला चुनरी पहनती है तो जग में कल्याण करती हैं। 

3.गुलबी रंग जिसे रानियों का कलर कहा गया है। 

और जब माँ लक्ष्मी गुलाबी चुन्नी पहनती हैं तो लक्ष्मी का रूप धारण कर धन दान करती हैं। 

4.श्वेत अर्थात सफेद ये रंग अपने आप में पवित्रता को लिए हुए है। ये रंग अपना अस्तित्व छोड़कर किसी भी रंग में रंग जाता है। अर्थात इस रंग को प्यार से चाहे जिस रंग में रंग लो। जैसे हमारे तिरंगे में इस रंग को शांति, सत्य और पवित्रता का चिन्ह माना गया है। 

                   जब माँ श्वेत चुनरीओढ़ सरस्वती का रूप धारण करतीं हैं तो जगत में ज्ञान बांटती है अर्थात विद्या दान करती हैं। 

5.हरा रंग प्रकृति को दर्शाने वाला रंग है। जिसे देख मन अपने आप में प्रसन्न और प्रफुल्लित हो जाता है। 

               इस हरे रंग को तिरंगे में श्रद्धा, विश्वास और देश की हरियाली और समवृद्धि का प्रतीक माना जाता है। 

6.केसरिया अर्थात आरेंज रंग वीरता और त्याग का सूचक है। और कल की जीत से जनता मोदीमय अर्थात हमारा मन  केसरिया मय हो गया है। 

7.काला रंग हम हिन्दुओं में किसी भी शुभ कार्य में वर्जित है। वहीं मुस्लिम धर्म के लोग शुभ मानते हैं। काला रंग कलंक लगने के अर्थ में भी किया गया है। तो वहीं दूसरी तरफ यही काला रंग आँखों में लग खूबसूरती भी प्रदान करता है और काला टीका लगाकर बुरी नजर से भी बचाया जाता है। 

जब काली माँ संघार करने चलती हैं तो काला चुनरी अर्थात काला वस्त्र धारण कर दुष्टों का रक्त पान करती हैं। 

             

जब सातों रंग साथ हो तो इसे इन्द्रधनुष कहते हैं। 
जब माँ  सातों रंग की चुनरी धारण करती हैं तो इनकी माया कोई नहीं समझ पाता है अर्थात इनकी माया इनकी सात बहनें भी नहीं समझ पाती हैं। और जब  इनकी कृपा हो जाय तो अज्ञानी एक पल में ज्ञानी बन जाता है। 

जब लिख रही थी तो लगा क्यों न हम इन रंगों के अस्तित्व को अपनाकर होली के रंगों के साथ खुशियां मनाएँ। 

होली के रंगों के साथ सभी बड़े और छोटे को होली मुबारक हो। 

                  होली के शुभ रंगों के साथ आपलोगों                                     की 

                          रजनी सिंह 



   9मार्च 2017

आज का  दिन मेरे लिए खास है्क्यों?क्यों कि आज मेरा जन्मदिन है। खुशी इस बात का  है कि मैं आज के ही दिन जन्म ली हूं। 12 बजते ही  मोबाइल फोन पर बधाई मिलने शुरू हो जाएगा। गिफ्ट भी मिलेगें, मन्दिर जाएगें, घूमने जाएंगे वैगरह वैगरह खुशियाँ मनाएँगे। आज ऐसे ही मुस्कुराती हुई खुशी से जन्मदिन मनाते – मनाते 41 साल की हो गई, यानी 41साल बीत गया है। खुशी इस बात की है कि मैं 41साल की होगई। दुःख इस बात का है कि इकतालिस साल का अनमोल समय बिना किसी उपलब्धि के गुजार दिया।

                            कविता 
आई थी इस दुनिया में कुछ नाम कमाने के लिए। 

नाम क्या कमायी रजनी रात के अंधेरे में सारी उम्र खो गई। 

अभी तो बचपन का दामन पकड़े ही थे। 
कि कम्बख्त बुढ़ापे के  दस्तक आने ही लगे। 

अभी तो बिता बचपन बड़े हुए। 

जिम्मेदारी का बोझ लिए जीने लगे हम ऐसे ही। 

अभी तो रजनी कुछ न किया चलने चलाने की बात न करो। 

बचे जीवन  हैं जो तो अपना नाम रौशन कर लो। 

वर्ना रात के अंधेरे में बचा जीवन भी खो जाएगा। 

और रह जाएगा बस केवल अंधेरा ही अंधेरा। 

इसलिए कुछ करके  रजनी जीवन के हसीन पलो को कैद कर लो। 

अपनी खुशियों को अपने रिश्तों को अपने पलू से बांध लो। 

क्या पता कौन कहां,  कब और कैसे बिछड़ जाए।

जन्म दिन की ढ़ेर सारी खुशियों के साथ आपकी                                 रजनी सिंह 


           महिला दिवस (8.3.17)

आओ महिला हम सब मिलकर महिला दिवस मनायेें। 
कुछ जीवन में करने खातिर सोयी शक्ति जगायें। 

दुर्गा बन उपकार करेंगे,  रण चण्डी  बन रण में लड़ेगें हम। 
कहीं काली बन दुष्टों का रक्त पान करेंगे हम। 

कहीं पालनहारी बनकरके सबका पालन कर लेगें हम।  

कहीं कल्याणी बन करके जगत कल्याण करेंगे हम। 

कहीं अनुसुईया, सीता बन पतिबरता धर्म निभाएगें हम। 

कहीं रानी लक्ष्मीबाई, तो कहीं  सावित्री बन जाएगें हम। 

कहीं आम औरत बनकरके ही जीवन का फर्ज निभाएगें हम। 

आओ महिला दिवस मनाकर आज  कुछ अच्छा करने का संकल्प लेकरके भारत का मान बढ़ायें हम। 

                      रजनी सिंह 

जिंदगी  में प्यार बचाओ ( Save Love) 5.3.17

जैसा  कि शीर्षक से ही नया और थोड़ा अटपटा लग रहा होगा। लेकिन ये मेरा कल्पना (धर्म युग की कल्पना में) है लेकिन भविष्य में ये सच भी होगा। इसको पढ़कर लोग मुझे पागल और मूर्ख ही समझेगें। लेकिन जो लोग ऐसा सोचेंगे उन्हें बताना चाहती हूँ कि प्रसिध्द वैज्ञानिक एडिसन को भी, और उनके अविष्कार करने के लिए किये गये प्रयोगों को मूर्खता के ही श्रेणी में रखा गया था। मैं जानती हूँ कि धर्म युग की कल्पना मेरी भी मूर्खता है। लेकिन ये मूर्खता एक दिन हकीकत में जरूर बदलेगा। 

                        चलिए अब मैं आपका ध्यान प्यार बचाओ पर लाना चाहती हूँ। यानी (Save Love) जैसे हमें बचपन से ही सीखाया जाता है  जल बचाओ, विजली बचाओ वैसे ही बच्चों को शिक्षा के माध्यम से “प्यार बचाना भी सिखाना चाहिए। 

मैं आज की नव युवा पीढ़ी को या आने वाली पीढ़ी को संदेश देना चाहती हूँ  कि थोड़ा सा प्यार अपने लाइफ पार्टनर के लिए बचाओ ताकि आने वाला  भविष्य या जीवन संवर सके। आज कल गर्लफ्रेंड – ब्वॉयफ्रेंड बनाना आम बात हो गई है। प्यार करना फिर टूट कर बिखरना भी आम बात हो गई है। क्या हम टूटने से पहले नहीं  सम्हल सकते हैं? सम्हल सकते हैं यदि हम थोड़ा सा चतुराई और समझदारी दिखाएं तब।                     अब हम आते हैं गर्लफ्रेंड – ब्वॉयफ्रेंड के शाब्दिक अर्थ पर। 

गर्लफ्रेंड का शाब्दिक अर्थ निकलता है – गर्ल =लड़की, फ़ेड =दोस्त। उसी तरह ब्वॉयफ्रेंड का भी शाब्दिक अर्थ वही होगा। 

फिर इसमें खास वर्ड कहाँ से आया बीच में। एक लड़की या लड़के से दोस्ती और प्यार करना गलत नहीं है व्लकि उस प्यार को खास बनाकर सपना देख उम्मीद लगाकर प्यार किया जाना गलत है। आज कल प्यार का गलत अर्थ लगाकर ही लोग अपना दिल या दूसरे का दिल तोड़ते हैं, जिसका परिणाम ये होता है। गम मिलता है, दिल टूटता है, एक दूसरे पर दोषारोपण और धोखा देने का नाम मिलता है। 

                    जैसे आजकल लोग किसी भी लड़के या लड़की से बात करते हुए देखकर बड़ा चाव से सोचते हैं कि जरूर ये गर्लफ्रेंड – ब्वॉयफ्रेंड ही होगा। भले ही वह भाई-बहन क्यों न हो। अरे गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड है तो है इसमें शाब्दिक अर्थ से बुरा क्या है? मैं बताऊँ गलत क्या है? गलत हमारी और आपकी सोच है। दोस्त बनाना कहीं  से गलत नहीं है। अपने अनुभव और समाज में होने वाले घटनाओं को देखते हुए कह सकते हैं कि हमारी और आपकी दोस्ती के प्रति गंदी सोच गलत है। 10 वर्ष से 20 वर्ष के उम्र में जाते  – जाते एक दूसरे के प्रति आकर्षित होना आम बात है। ये  प्राकृतिक देन है। लेकिन आकर्षण या दोस्ती या आकर्षण को पहले प्यार या आखिरी प्यार का नाम देना ही भूल है। क्या बेटे का मां की तरफ आकर्षित हो प्यार करना गलत है। या बहन से भाई का प्यार होना गलत है। नहीं इस  प्यार को कोई गलत नाम नहीं दे सकता है। क्यों कि इस रिश्ते में गंदी सोच नहीं है, इस रिश्ते में पवित्रता है। 

                मै समाज से पूछना चाहती हूँ कि क्या ये गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के रिश्तों में ये पवित्रता नहीं आ सकती है। आ सकती है यदि सोच पवित्र बन जाय तो इस रिश्ते को भी गलत रिश्ते के नाम से बचाया जा सकता है। मेरा समाज के उन अनुभवी व्यक्तियों से या इंसानों से प्रार्थना है कृपया इस रिश्ते को भी पवित्र मानकर एक अच्छा रिस्ता बनाने की  सीख दें न कि गलत सोच और  गंदी सोच से अपवित्र समझ गलत रिस्ते का नाम न दें। यदि ऐसा कोई करता है तो फिर उसके नजर में मां का बच्चे के प्रति आकर्षण, बहन का भाई के प्रति आकर्षण भी गलत ही मानना चाहिए। आकर्षण तो आकर्षण है फिर वो चाहे जिस के प्रति हो। क्यों कि किसी के प्रति आकर्षित होना प्राकृतिक देन या आम बात है। तो गर्लफ्रेंड – ब्वॉयफ्रेंड के प्रति आकर्षित होना कहां से गलत है। जिंदगी में मां फिर बहन उसके बाद, दोस्त, गर्लफ्रेंड फिर पत्नी से जुड़ना प्राकृतिक देन है। 

         “रिस्तों में प्यार या आकर्षण गलत नहीं” 

                  कविता 

मां से प्यार करो माँ से आकर्षण  होना गलत नहीं है। 

बहन से प्यार करो बहन से आकर्षण गलत नहींहै। 

लड़की से प्यार करो लड़की से आकर्षण गलत नहीं। 

दोस्त से प्यार करो दोस्त से आकर्षण गलत नहीं है। 

सबसे प्यार करो प्यार के प्रति आकर्षण गलत नहीं है । 

क्या गलत है अपवित्र वाला सोच गलत है। 

प्यार बचाओ किसके लिए, प्यार बचाओ लाइफ पार्टनर के लिए। 

थोड़ा प्यार बचाओ माँ के प्यार से। 

थोड़ा प्यार बचाओ बहन के प्यार से। 

थोड़ा प्यार बचाओ गर्लफ्रेंड के प्यार से। 

थोड़ा – थोड़ा प्यार बचाओ सब रिश्तों से। 

भविष्य संवारो प्यार बचा के। 

जिंदगी खुशहाल बनाओ प्यार बचाके। 

जैसे जल बचाते, वैसे प्यार बचाओ थोड़ा – थोड़ा। 
खुशियाँ पाओ ज्यादा – ज्यादा। 

Save Love कितना जरूरी। 

जल बचाना उतना जरूरी। 

Save Love कितना जरूरी। 

विजली बचाना उतना जरूरी। 

प्यार बचाना कितना जरूरी। 

करियर  बनाना उतना जरूरी। 

प्यार बचाना कितना जरूरी। 

भविष्य संवारना उतना जरूरी। 

प्यार बचाना कितना जरूरी। 

भारत को आतंकवाद से बचाना उतना जरूरी। 

प्यार बचाओ, प्यार बचाओ। 

खुशियाँ पाओ, खुशियाँ पाओ। 

नोट-प्रामरी स्तर को ध्यान में रखते हुए याद करने के लिए। लय बद्ध तरीके से गाने के लिए बनाया गया है। इस लिए सरल शब्दों का प्रयोग किया गया है।   एक समान दुनिया को प्यार करने वाली                         रजनी  सिंह     

क्या मिटने वाले बेकार मिट जाते हैं? (26.8.97)

क्या  मिटने वाले बेकार मिट जाते हैं?

क्या बेकार जाती हैं उनकी कुर्बानियां? 

क्या तपस्वी की तपस्या वेकार हो जाते हैं? 

क्या झूठ से जीतने वाले हार नहीं जाते हैं? 

क्या असत्य से पराजित होने वाले जीत नहीं जाते हैं? 

क्या फिर असत्य पराजय का मुँह नहीं देख पाते हैं? 

ये कोई प्रमाण दे दे सत्य हमेशा हार जाता है। 

मुझे तो अब तक ये प्रमाण मिल पाया है। 

सत्य का राह कठिन है लेकिन, 

अन्त समय वही मंजिल पाता है। 

जिसने सत्य को गले लगाया, 

जिसने सत्य का राह दिखाया। 

वही मंजिल तक पहुंचाने में राह दिखा पाते हैं। 

            सत्य की राही रजनी सिंह