Category: भजन

भजन करो

भजन करो मस्त जवानी में बुढ़ापा किसने देखा है। 

जब तुम बुढ़े हो जाओगे आँख के अंधे हो जाओगे। 

दर्शन करो मस्त जवानी में बुढ़ापा किसने देखा है। 

भजन करो मस्त जवानी में बुढ़ापा किसने देखा है। 

जब तुम बूढ़े हो जाओगे कान से बहरे हो जाओगे। 

भजन सुनो मस्त जवानी में बुढ़ापा किसने देखा है। 

जब तुम बूढ़े हो जाओगे हाथ से लूल्हे हो जाओगे।  

दान करो मस्त जवानी में बुढ़ापा किसने देखा है।   

जब तुम बूढ़े हो जाओगे पैर से लंगड़े हो जाओगे। 

तीर्थ करो मस्त जवानी में बुढ़ापा किसने देखा है। 

जब तुम बूढ़े हो जाओगे ह्रदय से मैले हो जाओगे। 

ह्दय में प्रभु को बसा लो तुम बुढ़ापा किसने देखा है। 

भजन करो मस्त जवानी में बुढ़ापा किसने देखा है। 

चुनरी पर नाम लिख दूँ 

मईया तेरे चुनरी पे नाम लिख दूँ, 

राम लिख दूँ घनश्याम लिख दूँ। 

एक तरफ राधा तो एक तरफ मीरा, 

बीच में मैं  रुक्मिणी का नाम लिख दूँ। 

राम लिख दूँ घनश्याम लिख दूँ, 

मईया तेरे चुनरी पे नाम लिख दूँ। 

एक तरफ शंकर तो एक तरफ गौरा, 

बीच में मैं गणपति और कार्तिकेय का नाम लिख दूँ। 

राम लिख दूँ घनश्याम लिख दूँ, 

मईया तेरे चुनरी पे नाम लिख दूँ। 

एक तरफ रिद्धि तो एक तरफ  सिद्धि, 

बीच में मैं गणपति का नाम लिख दूँ। 

राम लिख दूँ घनश्याम लिख दूँ, 

मईया तेरे चुनरी पे नाम लिख दूँ। 

एक तरफ सुलभा तो एक तरफ सेवरी, 

बीच में मैं गणिका का नाम लिख दूँ।

 राम लिख दूँ घनश्याम लिख दूँ, 

मईया तेरे चुनरी पे नाम लिख दूँ। 

एक तरफ पंडित तो एक तरफ पुजारी, 

बीच में मैं सेवकों का नाम लिख दूँ। 

राम लिख दूँ घनश्याम लिख दूँ, 

मईया तेरे चुनरी पे नाम लिख दूँ।  

  

एक तरफ ससुरा तो एक तरफ पीहर, 

बीच में मैं चारों धाम लिख दूँ। 

राम लिख दूँ घनश्याम लिख दूँ, 

मईया तेरे चुनरी पे नाम लिख दूँ। 


एक तरफ साजन तो एक तरफ बेटा – बेटी, 

बीच में मैं  भाई का नाम लिख दूँ। 

राम लिख दूँ घनश्याम लिख दूँ, 

मईया तेरे चुनरी पे नाम लिख दूँ, 


राम लिख दूँ घनश्याम लिख दूँ।  

               रजनी सिंह 

प्यार कभी कम न करना 4.9.17

प्यार कभी कम ना करना मईया थोड़े में गुजारा कर लेंगे। – 2
ना मांगू सोना ना मांगू चाँदी – 2

सिन्दुरा में गुजारा कर लेंगे – 2 गुजारा कर लेंगे – 2

ना मांगू हीरा ना मांगू मोती – 2

बिंदिया में गुजारा कर लेंगे – 2 कर लेंगे गुजारा कर लेंगे। 

ना मांगू धन माँ ना मांगू दौलत – 2

महवर में गुजारा कर लेंगे – 2कर लेंगे गुजारा कर लेंगे। 

ना मांगू गाड़ी माँ ना मांगू बंगला – 2

लालन में गुजारा कर लेंगे – 2कर लेंगे गुजारा कर लेंगे।  

प्यार कभी कम न करना मईया थोड़े में गुजारा कर लेंगे। कर लेंगे गुजारा कर लेंगे। 

           रजनी सिंह 



मीरा ने घर बार है छोड़ा 6. 9.17

मीरा ने घर बार है छोड़ा जग से नाता तोड़ दिया। 

एक धनवान की बेटी ने गिरधर से नाता जोड़ लिया। 

हरे रामा, हरे रामा, हरे कृष्णा हरे हरे – 2

विष का प्याला राणा जी ने भेजा मीरा ने स्वीकार किया, 

अमृत समझ के पीवे मीरा जब गिरधर का नाम लिया। 

हरे रामा हरे रामा हरे कृष्णा हरे हरे। – 2

सर्प पिटारा राणा जी ने भेजा मीरा ने स्वीकार किया। – 2

माला समझ के पहन ली मीरा जब गिरधर का नाम लिया। 

हरे रामा हरे रामा हरे कृष्णा हरे हरे। 

फांसी का फंदा राणा जी ने भेजा मीरा ने स्वीकार किया। 

झूला समझ के झूले मीरा जब गिरधर का नाम लिया। 

हरे रामा हरे रामा हरे कृष्णा हरे हरे। 

मीरा ने घर बार है छोड़ा जग से नाता तोड़ दिया। 

एक धनवान की बेटी ने गिरधर से नाता जोड़ लिया। 

हरे रामा हरे रामा हरे कृष्णा हरे हरे। 

               रजनी सिंह 



तेरे दर पर आये हैं 

[  तर्ज :दिल के अरमा आँसुओं में बह गये।] 

लेके कांवड़ हम तो घर से निकल पड़े। 

गंगा जी आके फिर हम जल भरें।। 

है मुसीबत रास्ते में गम नहीं। 

लेके भोला नाम हम तो निकल पड़े। 

    लेके कांवड़ हम तो घर से निकल पड़े। 

झोली खाली है हमारी कर दया। 

तेरे ही दर्शन को हम तो चल पड़े। 

लेके कांवड़ हम तो घर से निकल पड़े। 

सर पर गंगा जल चढ़ा कर मांगेंगे। 

बाबा दे दो भीख जो भी बन पड़े। 

लेके कांवड़ हम तो घर से निकल पड़े। 

तेरे दर पर आये हैं हम दूर से। 

बाबा तेरी हर नजर हम पर पड़े। 

लेके कावड़ हम तो घर से चल पड़े। 

सोना चांदी हीरा मोती कुछ नहीं। 

ऐसा वर दे सर से दुःख सब टल पड़े। 

लेके कांवर हम तो घर से चल पड़े। 

धूप कितनी तेज है तेरी राहों में। 

काश तेरी रहमतो का फल पड़े। 

लेके कांवर हम तो घर से निकल पड़े।  

                 रजनी सिंह 

श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो। 

आओ मेरी सखियों,  मुझे मेंहदी लगा दो। 

मेंहदी लगा दो मुझे ऐसी सजा दो। 

 मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो। 

सत्संग ने मेरी बात चलाई सद्गुरु ने मेरी कीनी रे सगाई।

उनको बुलाके हथ लेवा तो करा दो। 

मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो। 

ऐसी पहनू चूड़ी जो कबहूं न टूटे। 

ऐसा वरु दूल्हा जो कबहूं न छूटे। 

अटल सुहाग की बिंदिया लगा दो। मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो। 

ऐसी ओढूं चूंदरी जो रंग न छूटे। 

प्रीत का धागा कबहूं न टूटे। 

आज मेरी मोतियों से मांग भरा दो। 

मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो। 

भक्ति का शुरमा मैं आंख में लगाऊँगी। 

दुनिया से नाता तोड़ उन्हीं की हो जाऊंगी। 

सद्गुरु बुलाके फेरे तो पड़ावा दो।  

मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो। 

बांध के घुंघरू मैं उनको रिझाऊंगी। 

लेके एक तारा मैं श्याम – श्याम गाऊंगी। 

सद्गुरु को बुलाके डोली तो सजवा दो। 

सखियों को बुलाके विदा तो करा दो। 

आओ मेरी सखियों मुझे मेंहदी लगा दो। मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो।  

        ये गाना मैं अपने माँ से सुनी थी और उनके साथ गाती थी। 

            रजनी सिंह 


।शिव की महिमा गाओ। 

ओम नमः शिवाय बोलो ओम नमः शिवाय। 

शिव – शंभू का महा मंत्र है, मुक्ति का उपाय। 

बोलो ओम नमः शिवाय……………. ।

जब-जब डोले जीवन नैया शिव की महिमा गाओ। 

सारे जग के वो खिवैया शिव की महिमा गाओ। 

संकट आए कष्ट रुलाए जब-जब जी घबराए। – 2

बोलो ओम नमः शिवाय……….. ।

सबसे प्यारे सबसे न्यारे बाबा भोले – भाले हैं। 

भांग धतूरे की मस्ती में रहते मसस्त निराले हैं। 

बम – बम भोले कहते जाओ जो सब आये जाए। 

बोलो ओम नमः शिवाय………………. ।

आधा चंदा माथे सोहे गल सर्पों की माला। 

तेज धारी के तेज से पाए सूरज भी उजियाला। 

डम – डम डमरू बोले शिव का सातो सुर दोहराए। 

शिव का सातों सुर दोहराए। 

बोलो ओम नमः शिवाय………. ।

विपदा आयी राम पे भारी शिव शक्ति का जाप किया। 

बजरंगी की शक्ति बनके राम का शिव ने साथ दिया। 

रामेश्वर की पूजा करते राम यही फरमाए। 

बोलो ओम नमः शिवाय………………. ।



     गणेश भजन 

देखो ब्रह्मा और विष्णु महेश निकले संकट काटन को श्री गणेश  निकले – 2। 

देखो राम की महिमा न्यारी है उनके साथ में जनक दुलारी हैं। 

उनके बाणों से रावण के प्राण निकले संकट काटन को श्री गणेश निकले। 

देखो ब्रह्मा की महिमा न्यारी है उनके साथ में सरस्वती माता है। उनके वाणी से वेदो का सार निकले। संकट काटन को श्री गणेश निकले। 

देखो शिवजी की महिमा न्यारी है। उनके साथ में गौरी भवानी हैं। उनकी जटा से गंगा की धार निकले। संकट काटन को श्री गणेश निकले।

देखो कृष्ण की लीला न्यारी है। उनके संग में राधा रानी है। उनके मुख से गीता का ज्ञान निकले। संकट काटन को श्री गणेश निकले।

देखो ब़ह्ममाऔर विष्णु महेश निकले संकट काटन को श्री गणेश निकले। 

देखो हनुमान की महिमा न्यारी है। उनके संग में अंजना माई है। उनके हृदय में सिया राम निकले। संकट काटन को श्री गणेश निकले

देखो तुलसी की महिमा न्यारी है उनके सामने भोजन की थाली है। उनके सामने शालिग्राम निकले। 

संकट काटन को श्री गणेश निकले। देखो ब़ह्ममाऔर विष्णु महेश निकले संकट काटन को श्री गणेश निकले। 

      तेरा सहारा (11.7.17)

तर्ज – [आने से उसके आए बहार……] 

        

       भोले का भजन

कब से खड़े हैं झोली पसार, क्यों न सुनो मेरी पुकार, 

जग रखवाला है, मेरे भोले बाबा। 

तेरा ही सहारा है मेरे भोले बाबा।। 

देख लो लगी है, आज मंदिर में ये भीड़ भारी। 

दर्शनों की खातिर आए हैं, लाखों नर और नारी। 

आजा हे, त्रिपुरारी, दीनो ने पुकारा है, मेरे भोले बाबा। 

                  तेरा ही सहारा – – – – – – – – – ।

जिंदगी से हारे, गम जमाने का हम लेके आये। 

हाय रे इस जहाँ में, लोग अपने हुए हैं पराये। 

तेरे सिवा, दुनिया में, कोई न हमारा है, मेरे भोले बाबा। 

                तेरा ही सहारा है – – – – – – – – ।

रास्ता न सूझे, कहाँ जायें मुसीबत के मारे। 

आसरा है तेरा, दूर कर सारे संकट हमारे। 

सुनते हैं, तूने ही, लाखों उबारा है, मेरे भोले बाबा। 

               तेरा ही सहारा है – – – – – – – – ।

आ गये शरण में, बोझ पापों का सर पे उठाए। 

कर नजर दया की, भक्त जन तेरे गीत गाए। 

सेवा में, हमने तेरी, जिंदगी गुजारी है, मेरे भोले बाबा। 

                   तेरा ही सहारा है – – – – – – ।


देख तमाशा लकड़ी का 

हे लकड़ी! तू बन लकड़ी, अब देख तमाशा लकड़ी का, 

अब देख तमाशा लकड़ी का, अब देख तमाशा लकड़ी का। 

गर्भवास से बाहर निकला, झूले पालना लकड़ी का। 

पांच वर्ष की उम्र हुई, तब हाथ खिलौना लकड़ी का। 

हे लकड़ी…………………………. ।

बीस बरस की उम्र भई, तैयारी हुई ब्याह करने की। 

बांध सेहरा घोड़ी चढ़ गया, तोरण मांइया लकड़ी का। 

हे लकड़ी……………………..………।

चालिस बरस की उमर हुई, फिकर लगी है बुढ़ापे की। 

साठ बरस की हुई  उमर, तब हाथ सहारा लकड़ी का। 

हे लकड़ी…………………………….. ।

अस्सी बरस की उमर हुई, तैयारी भई अब चलने की। 

चार जना मिल तुझे उठाया, विमान बनाया लकड़ी का। 

हे लकड़ी……………….…………. ।

गंगा तट पर जाकर रख, स्नान कराया गंगा का। 

नीचे लकड़ी ऊपर लकड़ी चिता बनाया लकड़ी का। 

हे लकड़ी…………………………… ।

अधम आध शरीर जला, तब ठोकर मारा लकड़ी का। 

होरी फूंक दियो फिर, टुकड़ा डाला लकड़ी का। 

हे लकड़ी……….………………….. ।

हे लकड़ी तू बन लकड़ी, देख खेल बना सब लकड़ी का। 

ढोलक लकड़ी, बाजा लकड़ी, सितार बना है लकड़ी का। 

हे लकड़ी……………………………… ।