हठ और हौसला

जिंदगी भी क्या रंग दिखाती है जिसे अपना मानो वही पल में पराया सा होने का एहसास दे जाता है ।
पर अपना बनाने का हठ और हौसला भी तो देखो जो जितना ही दूरी बनाना चाहता है जिंदगी उसे उतना ही करीब रिश्तों में शामिल कर जाती है।
तदबीरें बदलती होंगी तेरे दिमाग से पर तकदीर का लिखा फैसला नहीं बदलता है,
देखती हूँ आज से, सही फैसला हौसला रखने वालों ने लिया है या नहीं, तदबीरें तो रोज बदलती हैं पर यदि रिश्तों को निभाने का हुनर सीख रखा है तो वे अपने कर्मों से तकदीर भी बदल सकता है, बस इसी आस पर जिंदगी का विश्वास तुझ पर सौंप रखा है।

रजनी अजीत सिंह 10.7.2019

हठ और हौसला&rdquo पर एक विचार;

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