जिदंगी की आखिरी अरमान लिख दूँ

आज अपने जीवन की अब आखिरी अरमान लिख दूँ।
कौन जाने सांसो की अब धड़कने कल सुबह चले न चले।
प्यार के एहसास के इस मेल में, अब ऐ मेरे हमदम, जीवन में ऐसी रंगीन हवा चले न चले।
जिंदगी का दौर अब खुशियों भरा, क्या पता कल खुशियों की हवा चले न चले।
कौन जाने मेरे आँखों में सपना क्या पले, देख लें सपना सुहाना क्या पता कल आँखों में सपना पले न पले।
कुछ नहीं है ठीक कि कब मौत आये इस सफर में, बातों का सिलसिला अब तुझसे चले न चले।
ख्वाब था सेहरा तुम्हारे सर देखें, तुझे देखने की हसरतें भी चल बसे।
क्या पता तेरे मन में मेरे प्यार का अब दीप जले न जले।
प्यार में जो दर्द इतना झेले हैं हम, क्या पता तुझे अब इस दर्दे प्यार का एहसास खले न खले।
दे रही हूँ आज शब्दों का उपहार मैं क्या पता अब मौत का फरमान टले न टले।
है मुझे विश्वास अंतिम समय में जब मांग मेरी सजी होगी सिंदूर से,
रस्म है जो लाली चुनर लाने की, पर क्या पता तेरे प्यार की लाली चुनर तब मुझे मिले न मिले।
आज अपने जीवन की अब आखिरी अरमान लिख दूँ।
कौन जाने सांसो की अब धड़कने कल सुबह चले न चले।
रजनी अजीत सिंह 12.12.2018

2 विचार “जिदंगी की आखिरी अरमान लिख दूँ&rdquo पर;

  1. आज अपने जीवन की अब आखिरी अरमान लिख दूँ।
    कौन जाने सांसो की अब धड़कने कल सुबह चले न चले।
    दिल को छू लेनेवाली पंक्तियाँ।लाजवाब।👌👌

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