सुहाना सफर की मीठी यादें।

एक बोल मीठा जो तुमने मुझसे बोला,

की फूलों सा जिंदगी में रंग आ गये।

लोट-पोट जाता है खुशी से मन मेरा,

सोच – सोचकर तेरी मधुर बोलियाँ।

तेरे आज आने से उतरे हैं झूले,

हवाओं का पहनकर माँगटीका।

नाचा है मन मेरा सोचकर हँसी आ गई,

कैसे बचपन में मासूम सी तू खेला करती थी गोद में मेरे।

सोचा जो मन ने जो सुख-दुःख सहा,

शब्द बनकर कविता के रुप में आ गये।

तेरे से बाते न करके सांसो को जो चलने से रोका था,

बात हुई तो रिश्तों में गंध उतरने लगी जाड़ों की गून गूनी धूप बनकर।

कुछ खुशियों का दौर ऐसा खनका,

मन में लगी यादें देशी गुलाब सा गमकने।

तेरी आँखों में जितना पीड़ा बहकर के निकले,

सफलता की सीढ़ियाँ उतने ही चढ़ोगी।

नींदो को जितना अपने से दूर करोगी,

दुंआ है हमारी उतना ही अपने सपनों को पूरा करोगी।

जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

रजनी अजीत सिंह 4.12.2018