महीना: सितम्बर 2018

जीवन का एक एक दिन बीत रहा है

जीवन का एक एक दिन बीत रहा है।
जिंदगी अपने लक्ष्य के लिए हर कदम के साथ आगे बढ़ रहा है।
क्यों थक रहा है राही तू चलने से,तेरी मंजिल बहुत ही करीब है।
खुशियों की सौगात ही मेरा ठीकाना है, कामयाबी के लिए हौसला रख जीवन संघर्षों के बीच गुजर रहा है।
न लोभ न मोह न धन-दौलत न सोहरत की चाहत।
बस मेरी लेखनी से निकले शब्द अमर हो,
इस वास्ते दिन – रात एक कर तन-मन की सुध खोकर मन जाग रहा है।
हमने मोह का दामन छोड़ा, माया का बंधन तोड़ा, छोड़कर अपनो की नगरी शब्दों से नाता जोड़ा।
जीवन का एक एक दिन बीत रहा है।
मिट्टी के पुतले हम मिट्टी में मिल जाना है, जितना कमाया धन साथ न जाना है।
जब संसार से अतिंम विदाई का वक्त आयेगा, तब नाम और यादें ही छोड़ जाना है।
मृत्यु ही जीवन का सच है, जिसे अटल सत्य मान हर सुख दुःख में समान रूप से खुशी खुशी जीते जाना है।
ये तन-मन धन तो अमर नहीं, बस नाम अमर कर जाना है।
रजनी अजीत सिंह 1.9.18
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