जिदंगी में “मेरा हमराह”

कभी – कभी मैं खो जाती हूँ चुपके से तेरे ख्यालों में।
तो यकीन नहीं होता कि ईश्वर ने तुम्हें मेरे लिए बनाया है।
तुम्हारा आकर्षक व्यक्तित्व, तुम्ही सवेंदनशीलता,खुशियों को बिखेरती तुम्हारी मजेदार बातें,
सबकुछ दोहराता है दिल अकेले में,
तब मुश्किल से विश्वास होता है कि मुझे अजनबी चेहरों के इस भीड़ में,
मेरी माँ ने तुम्हें तलाशा है मेरे लिए जिंदगी के सफर का हमराह……
कभी कभी जिंदगी जब यादों के सफर में खो जाता है, तो याद आता है वो बीता पल।
जब पहले पहल हमने जाना था एक दूसरे को….
दिल में एक हलचल सी पैदा होती है…
और छा जाता है जिंदगी के सफर में खुशियाँ ही खुशियाँ….
और मिल जाता है जिंदगी को खुशी से जीने का हसीन वजह और तेरा सम्बल रुपी सहारा….
रजनी अजीत सिंह 20.9.18
#जिंदगी
#सफर
#हमराह

4 विचार “जिदंगी में “मेरा हमराह”&rdquo पर;

  1. कभी – कभी मैं खो जाती हूँ चुपके से तेरे ख्यालों में।
    तो यकीन नहीं होता कि ईश्वर ने तुम्हें मेरे लिए बनाया है।
    waah kyaa khub likha hai……bahut sundar panktiya.

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