जिंदगी में “सवाल और जवाब”

कुछ सवाल मैं अपने आप से करना चाहती हूँ।
तेरी खामोशी से परेशान हो जवाब भी खुद ही ढूंढना चाहती हूँ।
क्यों इतना प्यार दे हक जताया, क्यों सोयी चेतना को फिर से जगाया?
क्यों मेरे अंधेरे जीवन में रौशनी फैलया?
जब पढ़ना ही नहीं था मेरे जिदंगी के एहसास को, तो क्यों लिखने का विश्वास जगाया।
पल में रोना पल में हँसना मेरी आदत थी फिर तुमने मेरी मुस्कान को अपने खुशी की वजह क्यों बनाया?
अब मैं अपने आपके सवालों से बिखर रही हूँ।
पर जवाब न पाने से मैं परेशान हो घूट रही हूँ।
जिंदगी इसी का नाम है साहब जो मैं सब भूलकर आगे बढ़ रही हूँ।
सब कुछ हारकर भी जिंदगी मेरी बेहतर है इस एहसास के साथ खुशी से जी रही हूँ।
रजनी अजीत सिंह 16.9.18
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6 विचार “जिंदगी में “सवाल और जवाब”&rdquo पर;

  1. अब मैं अपने आपके सवालों से बिखर रही हूँ।
    पर जवाब न पाने से मैं परेशान हो घूट रही हूँ।
    जिंदगी इसी का नाम है साहब जो मैं सब भूलकर आगे बढ़ रही हूँ।
    bahut khub……jindgi ki sachchaayee yahi hai…..behtrin.

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