जिदंगी में “चेहरे की चमक”

छीन ली थी दुनिया ने मेरे चेहरे की चमक,
और उपहार दिया था बनावटी हंसी दौलत से खरीदकर।
पर सबको क्या पता खुशी, चैन, सकूंन और चेहरे की चमक दौलत से नहीं,
ब्लकि अपनत्व के एहसास रुपी दो शब्दों से ही चेहरों पर खुशी बन छा जाता है,
और हमेशा के लिए अपना सुखद एहसास छोड़ जाता है।
रजनी अजीत सिंह 9.9.18

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