जिंदगी में “हाँ ये सच है”

हाँ ये सच है कि मैं तुम्हें एक पल के लिए भी भूलना नहीं चाहती हूँ।
तुम्हारी और अपनी खुशी के लिए तुम्हें अपनी बातों से पकाती हूँ।
पर यह भी सच है जब मैं तुमसे बात न करने की हठ करती हूँ तो मैं अपने आप को सताती हूँ।
सोना तपता है तब कुंदन बनता है यही सोच हौसला रख अपने होठों पर मुस्कान बिखेर अपना मन बहलाती हूँ।
हाँ सच है कि मैं नशा करती हूँ, सारे नशा में मुझे सबसे बड़ा नशा लेखनी से शब्दों को खेल खेलकर लिखने का है, जो लिखकर हर जख्म को सहलाती हूँ।
हाँ सच है कि मैं इस काबिल भी न थी कि मैं अपने आप को दुनिया के लिए लिख पाती, पर माँ ने धुव्र सा अटल तारा का मिलन चाँद से करवाया, मैं उस तारे को अपने शब्दों से संदेश पहुँचाती हूँ।
हाँ सच है कि शतरंज की चाल सा जिंदगी में मुझे जब सब मात देते थे तब मुझे बहुत गुस्सा आता था, पर तुम्हारा प्रोत्साहन भरे दो शब्दों का जब साथ होता था तो मैं न जाने कैसे शांत हो जाती थी। और सबकुछ भुलाकर दुश्मनों का भी भला करने के लिए आगे बढ़ जाती थी।
हां सच है कि मेरा कोई सच्चा दोस्त नहीं था जो मुझे समझ सके, सब अपने मतलब के लिए दोस्ती करते थे। मुझे अब खुशी देने के बहाने दर्द देने वाले रिश्तों की जरूरत नहीं क्यों कि मेरे सारे रिश्ते मेरे प्यार के एहसास से जुड़ गए जिससे मैं खुश हो जाती हूँ।
रजनी अजीत सिंह 4.9.18
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4 विचार “जिंदगी में “हाँ ये सच है”&rdquo पर;

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