रिश्तों में शीत का निवास है

जिंदगी में आज भी मेरे रिश्तों में शीत का निवास है।
मैंने जिंदगी में सब रिश्तों को संजोया,
इसलिए मेरी रुह भी मुझ पर कारसाज है।
मेरी जिंदगी में मेरे हमसफर ही हमराज़ हैं।
अब जिंदगी सच को ढूंढ ले, बस यही मेरी रुह की अवाज है।
सब रिश्तों को आग से बचाती जाऊँ मेरे देखे स्वप्न का ये अगाज है।
कांटे चुभते हैं बहुत इस राह पर लेकिन मेरा हौसला ही मेरी जीत की आस है।
रिश्तों को निभाने के लक्ष्य को भेद लूं, इसलिए लेखनी भी मेरी उठाई अवाज है।
जो रिश्तों को बचा ले जलती आग से,
उस आग को समाहित करने की ज्वाला का भी मुझमें में वास है।
हर रिश्ते – नाते हो रहे लहूलुहान है,
अब मरहम रुपी जीत का पताका भी मेरे हाथ है।
इस रुह की अवाज पर अब मेरे लक्ष्य को भी नाज है।
इस लक्ष्य को जो न भेदन किया, तो मेरी जिंदगी भी अब परिहास है।
जिंदगी में आज भी मेरे रिश्तों में शीत का निवास है ।
रजनी अजित सिंह 22.8.18
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8 विचार “रिश्तों में शीत का निवास है&rdquo पर;

  1. जिंदगी में आज भी मेरे रिश्तों में शीत का निवास है।
    मैंने जिंदगी में सब रिश्तों को संजोया,
    इसलिए मेरी रुह भी मुझ पर कारसाज है।
    मेरी जिंदगी में मेरे हमसफर ही हमराज़ हैं।
    kya khub shabdon men har rishton ko saheja hai……behtarin lekha.

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