जिंदगी में “लेखनी की दुनिया में मुझे बड़ा बनकर उभरना है”।

मुझे लेखनी की दुनिया में मुझे विचारों से बड़ा बनकर उभरना है।
कागज़ के पन्नों पर एक कवियत्री को सच बंया करने की चाहत है।
मेरी जिंदगी उलझी है पर व्यक्तित्व के निर्माण हेतु,
मेरी जिंदगी संघर्षों की एक दास्तान है।
असफलताओं के निराशा में कामयाबियों को नहीं खोना है।
सफलता – असफलता के युद्ध में सफलता ही पाना है।
जिंदगी को बेहतर बनाने में जिम्मेदारी के बोझ को उठाना है।
सफलता रुपी मंजिल को पाने में मुझे संतुलन आज भी बनाना है।
जिंदगी के बाधाओं को मात्रात्मक से आज भी तोलना है।
मंजिल को पाने हेतु गतिशील बनकर, मुझे लेखनी की दुनिया में बड़ा बनकर उभरना है।
रजनी अजित सिंह 22.8.18

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