महीना: जुलाई 2018

जिंदगी में ” क्या जरुरी है।”

जिंदगी में जब मैं अकेली हो जाऊं,

तो तुम्हारे प्यार का संबल कितना जरूरी होगा।

जब मैं अंधेरे में घिर जाऊँ, तो तुम्हारे प्यार का ज्योति कितना जरूरी होगा

जो याद आये ओ गुजरे पल, तो टाल सकूं मैं,

तब बहाना बनाना कितना जरूरी होगा।

जो झूलस जाऊँ दुनिया के मिले दर्द से,

तो माँ के आंचल का होना कितना जरूरी होगा।

जो मैं तुम में अगर खो जाऊं, तो तलाश करना कितना जरूरी होगा।

जब धैर्य का मेरा बांध टूट जाये, तो मेरा आँसू बहाना कितना जरूरी होगा।

जब बीच भंवर में नाव फंस जाए, तो किनारा का पाना कितना जरूरी होगा।

जब होगा मेरे सवालों का बौछार, तो जवाब देना कितना जरूरी होगा।

जब तुम्हारे यादों को शब्दों में ढालूं, तो तुम्हारा ख्याल आना कितना जरूरी होगा।

जो भीड़ में मैं अकेली हो जाऊं, तो कुछ अपनों का होना कितना जरूरी होगा।

उदासी से अपने मैं व्याकुल हो जाऊं, तो तेरे बातों से खुश होना कितना जरूरी होगा।

तेरी खामोशियों का जवाब दे सकूँ मैं, तो एहसास का होना कितना जरूरी होगा।

जो देखने को तुझे जी जो चाहे, तो आँखों में तेरी तस्वीर का होना कितना जरूरी होगा।

मंजिल मुझे जब पाना होगा, तो संघर्ष करना कितना जरूरी होगा।

जब ऊब जांऊ अपनी जिंदगी से तो ख्वाहिशों का होना कितना जरूरी होगा।

जब दर्द की दवा खाकर थक जाऊँ, तो रिश्तों में प्यार होना कितना जरूरी होगा।

मौत की नींद में जो अगर सो जाऊँ, तो जगाने को सपनों का होना कितना जरूरी होगा।

थमी सांस में प्राण फिर से आ जाये,

उन कसमों और वादों को निभाना कितना जरूरी होगा।

रजनी अजित सिंह 21.7.18

जिंदगी में “इम्तहान”

जिंदगी भी क्या क्या इम्तहान लेती है।
अपनो का दुःख देखकर बहुत बचैनी होती है।
पर जिंदगी ऐसा चक्र है कि चाहकर भी अपनों का दुःख बांट लेने नहीं देती है।
वक्त के हाथों हमें लाचार कर देती है।
😢रजनी अजित सिंह 😢16.7.18
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जिंदगी में “मैं शब्द तो तुम एहसास प्रिये”

मैं चंचल तुम शांत प्रिये, मैं प्यार तो तुम एहसास प्रिये।
मैं फूल तो तुम मुस्कान प्रिये, मैं गुलशन तो तुम बहार प्रिये।
मैं राधा तो तुम श्याम प्रिये,मैं सीता तो तुम राम प्रिये।
मैं माखन तो तुम स्वाद प्रिये, मैं जिस्म तो तुम जान प्रिये।
जाने ऐसे कितने शब्द प्रिये जो जुड़ जाते अपने आप प्रिये।
मैं लेखनी तो तुम शब्द प्रिये, मैं शब्द तो तुम अर्थ प्रिये।
जैसे जुड़े शब्दार्थ प्रिये, वैसे ही एक दूजे से जुड़े प्राणप्रिये।
मैं खुशियां तो तुम, खुशियों की दुकान प्रिये।
मैं तो खुशियाँ बाँटती ही रह जाऊँ प्रिये।
दुकान पर आते खरीदार प्रिये, जरा सम्हाल के रहना प्राणप्रिये।
रजनी अजित सिंह 14.7.18
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जिंदगी मुझे आजमाना छोड़ दे

मेरी जिंदगी मुझे तू अब आजमाना छोड़ दे।
मैं तेरी भी कुछ लगती हूँ, ये एहसास है मेरा,
इसलिए मुझे गैरों की तरह सताना छोड़ दे।
रिश्तों के एहसास की डोर से बँधी हूँ, कोई दिल्लगी नहीं की है,
तू हर बार बहाना बनाना छोड़ दे।
मैं कभी भी नष्ट होने वाली पतंगा हूँ,
दीपक के लौ के पास जाना ही फितरत है।
कम से कम जलते अंगारों में मुझको जलाना छोड़ दे।
न मैं तेरी खुशी की गीत हूँ, न मैं तेरी अपनी अवाज हूँ।
मैं बदनसीबी का गीत हूँ, मुझे गाना तू छोड़ दे।
तेरा साथ पाने से बढ़ जाती है खुशियाँ मेरी।
छीन लें न तेरी खुशियाँ मेरी बदनसीबी, अब तू मुझसे जबर्दस्ती के रिश्ते निभाना छोड़ दे।
यूं खामोशियों में मेरी खुशी के लिए, अवाज लगा देते हो कभी- कभी।
नहीं जो निभाना तो मुझे मेरे हाल पर छोड़ दे।
है पता मुझे भी तेरे जैसा मेरा जहाँ में कोई नहीं,
दर्द होता है मुझे अब अपनी खामियों को सोचकर।
जिंदगी में सांस और बढ़ती जाये न, अब तू दर्द की दवा देना छोड़ दे।
अपने को तुझे तेरे जैसा काबिल न बना पाऊं, इस एहसास से तेरी खुशियाँ छिन जाये।
ऐ जिंदगी उससे पहले मेरे एहसास का डोर ही तोड़ दे।
रजनी अजित सिंह 13.7.18

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जिंदगी रुठ के बैठी है

जिंदगी रुठ के बैठी है इस बारिश के मौसम में।

ऐ जिंदगी तू जिंदगी को रूठने ना दे उसे हँस के मना ले इस बारिश के मौसम में ।

बोल भले कड़वा हो, उसे दिल पर न ले वल्कि ह्रदय से लगा ले इस बारिश के मौसम में

सावन के आगमन की खुशी में मेघ उमड़ घुमड़ के हैं बरसते।

कहीं विरहन अँखियाँ जिंदगी से अपने मिलने को हैं तरसती इस बरिश के मौसम में।

इस विरहन के आँखों में तो बारहो मास सावन की झड़ी है।

अब इन आँखों की झड़ी को रोक जिंदगी, जिदंगी से मिलने की ऋतु आयी।

बरखा बहार आई,रूठी जिंदगी को मनाने खुशियां अपार लाई।

विरहन की प्यास बुझी मिलन अब बरखा बहार आई।

धरती पर हरियाली छाई खुशियां ही खुशियां आयी इस वारिश के मौसम में।
रजनी अजित सिंह 13.7.18

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जिंदगी में “आदत छोड़ने की असमर्थता”

आदत छोड़ने की असमर्थता हमें तकलीफ हैं देती।

जब हम होते बहुत पीड़ित तो व्यथा ही आदत से छुटकारा दिला है देती।

जब हमअपनी कमी से व्यथा महसूस करते हैं तो पीड़ा आसक्ति से दूर कर है देती।

यदि हम दुर्गुणों को हटा नहीं सकते तो चिंता, अभिमान, क्रोध, कामना, दुःख सबको एक दूसरी दिशा में आयाम क्यों न हैं देते।

छोटे – छोटे बातों पर नाराज होने का तुक ये है कैसा?

नाराज ही होना है तो अनन्तताऔर ब्रह्म के प्रति नाराज क्यों न हों।

यदि हम अहंकार को खत्म कर नहीं सकते तो ये अहंकार हो कि ईश्वर हैं हमारे।

यदि आसक्ति हम पर छायी है तो क्यों न सत्य के प्रति आसक्त हो जाये।

यदि हमें ईर्ष्या सताती है तो सेवा करने के लिए ही ईर्ष्या कर लेते।

दिव्यता के प्रति इतना मदहोश हो जाये की गुरु से राग कर लेते।

रजनी अजित सिंह
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जिंदगी में “शब्द और भाव”

परेशान न होना मेरी बातों से,
जैसी हूँ मैं वैसे ही मेरे एहसास भी हैं।
खुशी देना चाहती हूँ अपने शब्दों से,
पर मन में उठ रहे भाव ही ऐसे हैं,
कि परेशान कर देती हूँ अपनी नादान बातों से।
रजनी अजित सिंह 12.7.18
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जिंदगी में “रिश्तों की डोर”

मुझे तेरे प्यार का एहसास है,
पर तू तो इस प्यार से दूर हुआ बैठा है।
तुझसे मजबूत रिस्तों की डोर बांधी है,
एक दूसरे के गम को बांटने के लिए,
पर तू तो जानबूझकर नासमझ बन बैठा है।
मेरी तमन्ना है तेरी मंजिल, तेरी ख्वाहिशें, तेरे सपनो को पूरा करना,
पर तू तो मेरे रिश्ते को नजरअंदाज कर बैठा है।
रजनी अजित सिंह 12.7.18
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जिंदगी में “कुछ सपने”

बैठी थी यूं ही साथ में जिम्मेदारियों का बोझ लिए।
पता न चला मेरी जिंदगी में कब प्यार की बरसात हो गई, कब दिन बीता कब रात हो गई।
अपनी जिंदगी तो उस एहसास से अबाद हो गई, पर कहती है दुनिया उसकी जिंदगी बर्बाद हो गई।
उसके माथे का बल, खामोशी, उदासी बुझा चेहरा बताता था कि कई धोखा खाया था उसने।
उसी गम को बांटने के लिए प्यार के जल से सींचना चाहा था हमने, पर कुछ दिनों में ही मेरे प्यार का एहसास तार तार हो गया।
कुछ रिश्ते – नाते अपने स्वार्थ के लिए जुड़ते हैं, कुछ रिश्ते जन्म – जन्मानतर के होते हैं।
इसी एहसास को निभाने के लिए अपमान भी सहा पर उफ तक न किया हमने।
सपने में देखा किसी के बारात में खुशी से नाच रही हूँ, आँख खुली तो देखा मेरे बगैर ही उसकी खुशियों की बरात निकल गई।
टूट के रह गये सपने आँख खुलने के बाद,ख्वाहिशें दफन हो गई धीरे धीरे अपने पराये के बीच फर्क करने के साथ।
रजनी अजित सिंह 12.7.18
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जिंदगी में “क्या खोया क्या पाया”

जीवन का लेखा जोखा करने बैठें तो अजब ग़ज़ब अनुभव सामने आएँ।
एक कवि हृदय के लिए ये हमेशा मनभावन विषय रहा है।
Collab करें YQ Didi के साथ।

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Collaborating with YourQuote Didi

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