जिंदगी में “प्यार हर रिश्तों में”

प्यार कहते हैं किसे ये कहना मुश्किल है।
सदियों से प्यार हर रिश्तों में पाया है हमने।
कहीं जननी – सूत का प्यार तो कहीं भाई बहन का प्यार
या यूं समझे की हर रिश्तों में प्यार।
मगर प्रेमी – प्रेमिका तक सीमित कर छोड़ा है सबने।
कोई कहता प्यार क्या है?
कोई कहता ये प्यार का एहसास क्या है?
कोई कहता जज्बात और रिश्तों का भाव क्या है?
मैं इन सारे सवालों का जवाब एक ही देकर कहती हूँ।
हर रिश्ते को प्यार से निभाने की कला ही सच्चा प्यार और
खूबसूरत प्यार का एहसास है।
कृष्ण का यशोदा नंद के के प्रति सुखद एहसास भी प्यार ही था।
कृष्ण का सुभद्रा और द्रोपदी के प्रति सुखद रिश्तों का आभास भी प्यार ही था।
रुक्मिणी और राधा के प्रति अनुराग भी प्यार ही था।
मानती हूँ हर प्यार का अपना एक जगह है पर नाम और एहसास तो प्यार ही था।
जिस प्यार में त्याग और समर्पण एक दूसरे के खुशी के लिए पनपता है
सही मायने में प्यार उसी का नाम है।
रजनी अजीत सिंह 8.6.18
#प्यार्
#रिश्तों
#समर्पण
#yqbaba
#yqdidi

Follow my writings on https://www.yourquote.in/rajnisingh #yourquote

5 विचार “जिंदगी में “प्यार हर रिश्तों में”&rdquo पर;

  1. खूबसूरत।——–
    प्रकृति ने शुरू से ही प्रेम,त्याग और समर्पण सिखलाया। छल और द्वेष तो हमने बनाया।आज जिसे हम प्रेम कहते हैं वह छिछला सोच है।
    प्रेम कहाँ नहीं,
    हर जीव में प्रेम है,
    पेड़ पौधे और पंक्षी भी प्रेम करते हैं।
    हम जरा भी मन की बात न मानी जाए तो जन्म देकर अपनी खून से सिंचनेवाली माँ तक को नही छोड़ते।
    बड़े स्वार्थी हैं हम,स्वार्थ की बातें करते हैं,
    फिर प्रेम करनेवाले हमपर जान न्यौछावर करते हैं।

    Liked by 1 व्यक्ति

टिप्पणियाँ बंद कर दी गयी है।