जिंदगी में आनलाइन आफलाइन का सस्पेंस।

जिंदगी कब तक आनलाइन रहती है जब तक सांस है और फिर हमेशा के लिए आॅफलाइन हो जाती है।
सोशल नेटवर्क पर हम कब तक आनलाइन रहते हैं जब तक नेटपैक है।
अरे यार नेट पैक खत्म होने पर hot-spot चला के आनलाइन हो जाता है। क्या रियल जिंदगी में जब सांसे थम जाये तो कोई एक दूजे की जिंदगी बचाने के लिए हाटसपाट आन कर किसी की जिन्दगी को आनलाइन करेगा क्या?
अजब ही कहानी है आनलाइन और आफलाइन का मुझे समझ नहीं आता है
कोई है ऐसा बुद्धिमान जो मेरे खोपड़ी में भी कुछ शब्दों से समझा दे।
😁रजनी अजीत सिंह 15.5.18 😁
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