जिंदगी में मासूम की आहें।

मौन हो मासूम की जिंदगी बर्बाद कर होगे जिंदा अपनी नजर में तुम।
मगर मेरी नजरों में जमीर के बिना मरे हुए के समान हो तुम।
लाख कोशिश कर लो खुश होने की पर कभी चैन से नहीं जी पाओगे तुम।
अपने किये कर्मो की सजा से कभी भाग न पाओगे तुम।
उठते – बैठते, जागते – सोते तेरे आँखों में नींद की जगह बेचैनी का आलम होगा कभी चैन से सो ना पाओगे तुम।
उस मासूम की आहें पीछा न छोड़ेगी मौत से बत्तर जिंदगी होगी जिसे चाहकर भी भुला न पाओगे तुम।
रजनी अजीत सिंह 30.4.18
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