जिंदगी में भाषा का महत्व।

भाषा की परिभाषा करना बहुत ही कठिन है फिर भी कुछ परिभाषा से हम बताते हैं भाषा है क्या?
महाभाष्य का पतंजलि के अनुसार “जो वर्णो द्वारा व्यक्त होती है उसे भाषा कहते हैं।”
इनसाइक्लोपीडिया बिट्रैनिका ने बताया है “ध्वन्यात्मक प्रतीकों की उस ऐच्छिक व्यवस्था को भाषा कहते हैं जिसके माध्यम से एक समाज समूह के के सदस्य रूप में तथा सम्बद्ध संस्कृति के भागीदार के के नाते मनुष्य परस्पर विचारों का आदान-प्रदान करते हैं।”
कोई भी भाषा एक निश्चित मानव समाज में बोली जाती है।
भाषा की एक निश्चित व्यवस्था होती है।
भाषा पैतृक सम्पत्ति नहीं होती है।
मनुष्य भाषा का अर्जन करता है।
भाषा अनुकरण द्वारा सीखी जाती है।
भाषा परम्परागत होती है।
भाषा परिवर्तन शील होती है।
इसकी निश्चित भौगोलिक तथा ऐतिहासिक सीमा होती है।
भाषा के व्याकर्णिक सघटना में अन्तर होता है।
ये संयोगा अवस्था से वियोगा अवस्था की ओर बढ़ती है।
बोली और भाषा में अन्तर स्पष्ट करना मुश्किल है।
कोई भी बोली भाषा से उत्पन्न होती है इसलिए हम इसे माँ बेटी का सम्बन्ध होता है ऐसा कह सकते हैं। भाषा चीर परिवर्तनशील है।
जब हम भाषा और लिपि पर विचार करते हैं तो भाषा अपने मूल रूप में ध्वनि पर अधारित है।
रजनी अजीत सिंह
#भाषा
#लिपि
#बेटी
#yqbaba
#yqdidi

Follow my writings on https://www.yourquote.in/rajnisingh #yourquote

Advertisements

2 विचार “जिंदगी में भाषा का महत्व।&rdquo पर;

एक उत्तर दें

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

w

Connecting to %s