जिंदगी में बाबूजी की यादें।

मेरे बाबू जी थे बहुत महान, आर्मी के वे सैनिक थे, सारा जीवन अर्पित कर मान बढ़ाया भारत की।
रग रग में वीरता और साहस भरा था, साक्षात मूर्ति दिखते थे वो त्याग और बलिदान की।
अपने देश के आन के खातिर लड़ाई लड़ी 1962,1965, 1971दोनों बार ही चाइना और पाकिस्तान की।
उनकी छोटी बेटी मैं हूँ मैं चाहूं देश के लिए कुछ कर जांउ अपने शब्दों से ही अपने देशवासी के मन में जोश कुछ भर जांऊ।
मेरे बाऊजी एक बहुत वीर सैनिक थे उन्होंने हमें हर हथियार चलाने सीखाया था ताकि हम अपनी सुरक्षा स्वयं कर सके। हमारे बाबूजी अब्दुल हम्मीद का नाम सुना होगा उन्ही के बैच के थे वो शहीद हो गए तो उनका नाम अमर हो गया। हमारे बाबूजी हम बेटियों को बेटे से अधिक मानते थे और हर सिचुएशन में यदि हथियार साथ न हों तो आने वाले समस्या से कैसे निपटे ये भी अच्छी तरह से सीखाया था। आज वो इस दुनिया में नहीं रहे पर भूतपूर्व सैनिक के रूप में हमेशा हमारे देश और हमको गर्व है।
रजनी अजीत सिंह 19.4.18
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