जिंदगी में चौकट पर बैठी है शाम।

चौकट पर बैठी है शाम
दिल में हजारों तमन्ना लिए
हुई है बेकरार माँ हर शाम।
जब बच्चे सही सलामत लौट आए
तो दौड़कर गले लगाती है माँ हर शाम।
यदि हो जाए थोड़ा सा भी देरी
तो तड़प उठती है अनहोनी से
चौकट पर बैठी माँ हर शाम।
तब कहीं चैन आता है जब चूमती माथा है
चौकट पर बैठी माँ हर शाम।
रजनी अजीत सिंह 20.4.18
#चौखटपरशाम
#तड़प
#अनहोनी
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3 विचार “जिंदगी में चौकट पर बैठी है शाम।&rdquo पर;

  1. Maa ki baat hi niraali…….
    जिसका अपना अरमान नहीं,
    क्या कष्ट उसे कुछ भान नहीं,
    जिसके दिल केवल प्रेम बसे,
    आँखों से केवल स्नेह बहे,
    उर में अमृत का सागर है,
    वातसल्य भरा महासागर है,
    कोई और नहीं वह माँ ही है,
    कल जैसी थी वैसा ही है,
    ऐसी ममता कहीं और नहीं,
    माँ से बढ़कर कोई देव नहीं
    धड़कन में तबतक जान नहीं,
    है पास अगर संतान नहीं,
    ऐसी ममता का क़द्र अगर,
    जो करता है इंसान नहीं,
    फिर सृष्टि में उससे बढ़कर,
    कोई दूजा है शैतान नहीं,
    फिर सृष्टि में उससे बढ़कर,
    कोई दूजा है शैतान नहीं|

    Liked by 1 व्यक्ति

    1. वाह मधुसूदन जी बहुत ही अच्छा लिखा है आपने। इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका जो आपने इतनी अच्छी कविता से मेरे ब्लॉग को सजाया। 👌💐👏

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