जिंदगी खामोश।

यदि मैं खामोश हो गई तो क्या मेरी नादान सी बातों को कभी भूला पाओगे।
जितना दर्द हमने सहा है खामोश होकर क्या मेरा दर्द महसूस कभी कर पाओगे?
जानती हूँ तेरे जिंदगी में मेरी बातों का कोई अहमियत नहीं, मैं न सही मेरी बातें तुम्हारे साथ है झूठा ही सही क्या ये एहसास करा पाओगे।
मैं फिक्र करती हूं तो थोड़ी सी तुम भी कर लिया करो क्या इतनी सी खुशी मुझे दे पाओगे।
अपनी जिंदगी में मैं भी बहुत बीजी हूँ पर रिश्तों में प्यार जताने या फिक्र करने के लिए बीजी लाइफ से कोई वास्ता है क्या मुझे इतना समझा पाओगे।
रजनी अजीत सिंह
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7 विचार “जिंदगी खामोश।&rdquo पर;

        1. जी मैं तो YourQuote par लिखती हूँ बस वर्डप्रेस पर शेयर कर देती हूँ। मैं भी आपकी ही रचना पढ़ रही थी आप बहुत अच्छा लिखते हैं अपना लिखना बंद मत कीजियेगा।

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