जिंदगी में चुप्पी तोड़ो।

चुप्पी तोड़ो अन्याय के खिलाफ,
चुप्पी तोड़ो अनाचार, दुराचार, व्यभिचार, भ्रष्टाचार के खिलाफ।
चुप्पी तोड़ो जातिवाद, आतंकवाद, और पार्टीवाद के खिलाफ क्यों कि सारा जगत अपना है फिर विरोध कैसा?
चुप्पी तोड़ो परतंत्र, राजतंत्र, लोकतंत्र के सत्ता के खिलाफ जो जनता को मूर्ख बनाती है और मूर्ख समझती है।
चुप्पी तोड़ो बुरे कर्मों के खिलाफ और बता दो हर अच्छे इंसान के अंदर भगवान् है।
अभी हम कल्पना करते हैं – हमारा देश ऐसा हो, हमारा सारा जगत अपना हो, हमारा नायक ऐसा हो जो प्रजा को न्याय दिलाने वाला हो अन्याय के विरुद्ध, और न जाने कितनी बातें हैं जिस कल्पना को हम शब्दों में बयां नहीं कर सकते। लेकिन अब जागो कल्पना की दुनिया से बाहर निकलो,हमें अपने अन्याय की लड़ाई न्याय पाने के लिए खुद लड़नी होगी और “यथार्थ” की धरातल पर ही हमें अपने जहाँ में स्वर्ग का निर्माण “यथार्थ में रहकर ही करना होगा तभी एक ऐसी सुन्दर दुनिया का निर्माण होगा जो अकल्पनीय होगा अर्थात बहुत ही खूबसूरत होगा।
रजनी अजीत सिंह 5.4.18
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4 विचार “जिंदगी में चुप्पी तोड़ो।&rdquo पर;

  1. जब लोग स्वार्थ में होते हैं वे चुप ही होते हैं।मगर जब भी स्वार्थ से ऊपर उठने की कोई बात करता है वे आंदोलन पर आ जाते हैं।उन्हें ना तो देश की चिंता होती है ना अपनों की।

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