जिंदगी में गाँव की यादें।

गाँव और शहर के विरोधाभास का चित्रण कीजिये।
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गाँव की हर पगडंडी शहर की ओर जाती हैं
लेकिन शहर के सभी रास्ते गाँव तक नहीं आते वजह ये है कि गाँव के लोग, गाँव के पगडंडी पर चलते हुए शहर तो जाते हैं क्यों कि उनकी मजबूरी रोजी रोटी की तलाश है जो शहर की तरफ खींचता है और एक बार शहर जाने के बाद जिंदगी ऐसे फंस जाती है कि गाँव की हंसी पुरानी यादें भी लौटने नहीं देती और फंसा देती है अच्छे संसाधनों के बीच और फिर हर मनुष्य का मंजिल शहर में बन जाता है यही वजह है कि शहर के सभी रास्ते गाँव तक नहीं जाते क्यों कि कोई वापस आना ही नहीं चाहता तो शहर के सभी रास्ते गाँव तक कैसे आते। अन्त में बस गाँव की सुहानी यादें और पतली पतली पगडंडी हमेशा मनको याद दिलाती हैं और पुरानी यादों में हमेशा बसकर दफन हो जाती हैं मन में और न चाहते हुए भी बस जाता है शहर में या गाँव में रहकर भी शहरी संसाधनों के माध्यम से गाँव की छवि भी शहर में बदल जाती है और न जाने कितने गाँव शहर में तब्दील हो जाते हैं।
रजनी अजीत सिंह 5.4.18

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2 विचार “जिंदगी में गाँव की यादें।&rdquo पर;

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