जिंदगी में “दीदी” का महत्व।

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आज के लेखन चैलेंज को आप सब अपनी दीदी को समर्पित करें जो आप के परिवार को बड़ी मज़बूती से आधार प्रदान करती हैं।

मेरी दीदी “ममता की मूर्ति है, साथ तो बिछड़ गया, मगर शादी के बाद भी सलामती की दुंआ की चाहत वही रही।
दूर चाहे जितना हों, मगर आपस के प्यार की ताकत वही रही।
शायद ये प्यार है एहसास का, लड़ाई कितनी भी हो, मगर दिल में इज्जत की जगह भरपूर रही।
तेरे दूर होने से थोड़ा अकेलेपन का एहसास जरूर हुआ, मगर प्यार की दौलत अभी भी भरपूर रही।
यूं तो बातें और बचपन का साथ तो कब का छूट गया, मगर जो प्यार दिल में बसाया था वो दौलत वही रही।
कदम में सबने लाकर डाल दी नेमते मगर, दूर होने के एहसास रूपी कांटों की चुभन वही रही।
मेरे खाने की चीजें जो देती थी “दीदी”
प्यार से, बासी भले हो जाये चाहे, मगर उसमें प्यार का स्वाद की मिठास खूब रही।
चैलेंज जब लिखने को देती है ये “दीदी” तो समझ नहीं आता क्या लिखूं, मगर
लिखने बैठती हूँ तो उसके ज्ञान के भण्डार में गोता लगा लिखने की खुशी खूब मिलती रही।
रजनी अजीत सिंह 2.4.18

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