जिंदगी में जीवन रूपी इच्छाएं।

कहा जाता है इच्छाएँ दुख का कारण हैं, लेकिन यही इच्छाएँ जीवन को विविधता से भरती हैं। अपने विचारों को उड़ान दीजिये।

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यही इच्छाएं है मेरी कि-
सदाबहार वृक्ष सा कुछ जीवन अपना बन जाता।
कभी इस जीवन में पतझड़ का मौसम ना आता।
चाहे धूप मिले या छांव मिले वर्षा सा प्यार फुहार मिले।
सुख दुःख की चाह नहीं होता, आंसू और गम भी ना होता।
मान मिले अपमान मिले इसका परवाह नहीं होता।
सदाबहार वृक्ष सा कुछ जीवन अपना बन जाता।
चाहे कुछ भी हो जाए बस प्यार ही प्यार हम बांटे।
नफरत करने वाले की परवाह नहीं होता।
चेहरे से खुशियां ही झलके उदासी की जगह नहीं होता।
सदाबहार वृक्ष सा कुछ जीवन अपना बन जाता।
फल फूल भले ना दें पांए तरु के शीतल छांव में सदा , विश्राम मिले थकान की जगह नहीं होता।
सदाबहार वृक्ष सा कुछ जीवन अपना बन जाता।
रजनी अजीत सिंह 3.4.18

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2 विचार “जिंदगी में जीवन रूपी इच्छाएं।&rdquo पर;

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