जिंदगी में जिंदगी को जीने का अंदाज।

दूरी हो तो रिश्तों और दोस्तों का अहसास होता है। जिंदगी में कुछ उसूल और न्याय करने का जज्बा हो तो जिंदगी जीने का अंदाज खास होता है।
दोस्तों और रिश्तों के बिना जिंदगी कितना उदास होता है। उसूल और संस्कार सिंचित नहो तो जिंदगी जीना ही बेकार होता है।
हर घर में भारतीय संस्कृति की शिक्षा होती। तो पाश्चात्य संस्कृति की हार होती।
उम्र तो कीड़ों मकोड़ो की तरह कट ही जाती है।
पर जिंदगी में कुछ कर गुजरने का जज्बा रखो तो मौत के बाद भी दुनिया याद रखती है।
तुलिकाऔर लेखनी से अश्लील तस्वीरें और लेख लिखने और उकेरने से कहीं प्रसिद्धि मिलती है।
भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए लेखनी और तुलिका चलाओ।
तब देखो भारतीय संस्कृति की क्या आन बान शान होती है। नर और मादा के तन का नुमाइश लगा प्रसिद्धि पायी तो क्या पायी।
श्रृंगार का वर्णन पर्दा में करते करते कब उसे बेपर्दा कर रति क्रिणा पर ऊतर आये और अपने भाव के साथ रिश्तेंऔर भारतीय संस्कृति को भी शर्मसार कर दिया।
दुर्गा को सौम्य रूप में ही रहने दो मेरे दोस्तों मेरे भाई और बहनों, चाचा चाची, यदि श्रृंगार रस और सौम्य रस से पर्दा हटा तो काली के रौद्र रस और नग्न काली का रूप धर दुष्टों का संघार होता है।
रजनी अजीत सिंह सिंह 10.8.17
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