जिंदगी में सतरंगी सपने।

मेरे अपने सतरंगी सपने कभी अपने नहीं हुए, ये सतरंगी सपने तो सपने है, लेकिन यहाँ अपने भी,कभी अपने नहीं हुए।
जागते लोग भी देख लेते हैं सपने, नींद में देखने की बात ही निराली है।
सतरंगी सपने की बात करें तो कोई बेगाना होकर भी अपना लगता है, कोई अपना होकर भी बेगाना लगता है। कोई बेवफा होकर भी वफा की तलाश करता है, कोई वफा करके भी बेवफा बन जाता है।
ये सतरंगी सपने हैं इसके रंग भी अजूबे है, सपने कभी किसी के जिंदगी में खुशी की दस्तक देती है, तो वो सब कुछ गंवाकर मरना चाहता है।
सपने में क्या कहूँ हकीकत में भी कभी किसी को मौत ने लाखो बार मारना चाहा है, तो भी वह सब कुछ भुलाकर, खुशी बांटकर जीना चाहता है।
सपने कैसे? कैसे सतरंगी सपने, सपने क्यों दिखते है? आप किसके लिए खुली आँखों से सपने देखते हैं? इसका वर्णन करना ही मुझे मुश्किल लगता है। कहीं सपने किसी की जिंदगी अबाद करते हैं और कहीं न चाहकर भी किसी की जिंदगी बर्बाद कर देते हैं।
मेरी लेखनी शब्दों का एहसास कर स्वछंद मष्तिष्क में सतरंगी सपने बुनती है और उसी सपनों की दुनिया विचरण करती है।
रजनी अजीत सिंह 30.3.18

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