जिंदगी में जल संचय का संदेश।

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नमस्ते प्रिय लेखको।

22 मार्च को Water Day के रूप में मनाया गया। हम अक्सर विशेष दिन के लिए किसी प्रयोजन को याद रख पाते हैं मगर उस के बाद अपनी आम ज़िन्दगी में फिर से मसरूफ़ हो जाते हैं कि महत्वपूर्ण बातें हाशिये पर चली जाती हैं।

पानी का सदुपयोग और संरक्षण न केवल हमारा कर्तव्य है बल्कि मानव सभ्यता की सुरक्षा के लिए एक अहम ज़रूरत है। इस विषय पर लेखन challange प्रस्तुत करने के पीछे मक़्सद केवल इतना है कि एक हल्की सी याद बहुत अंदर तक हमें झिंझोड़ देती है।

लिखें और अपने आस पास के जानने वालों को भी अपने उद्देश्य में सम्मिलित करें।

शुभकामनाएँ।

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1 – जल संचय – संचय सब कहे, संचय किया न कोय।
जब संचय की आदत पड़े, सूखा की नौबत काहें को होय।।

2 – वे नर तो धन्य है जो अनावश्यक जल गिराना छोड़ देय।
पर उपकार के कारणे, कम से कम जल उपयोग में लाये।।

3 – नल उतना ही खोलिए, जितना काम बस होय।
कहे “रजनी “अब जल का स्रोत घट्यो, आने वाले दिनों में त्राहि-त्राहि मच जाय।।

4-वर्षा का जल संचय करे,और जब पेड़ पौधा लगाय।
जब जल स्तर बढ़े, तो सूखा काहें को होय।।
रजनी अजीत सिंह 24.3.18
#संचित
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7 विचार “जिंदगी में जल संचय का संदेश।&rdquo पर;

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