जिंदगी में क्या प्यार और जंग में सब जायज है?

प्यार शब्द त्याग और समर्पण और बलिदान का नाम है।”प्यार में हब्सी हो गलत काम को करना जायज नहीं कहा जा सकता है। “प्यार में सब जायज है”।
प्यार शब्द अपने आप में अद्भुत शब्द है। जो सच्चा प्यार करता है वह न उतने नीचे स्तर तक गिर सकता हैं न हीं किसी की अपने स्वार्थ के लिए जान ले सकता है।
यहां मैं एक प्रश्न से स्पष्ट कर रही हूँ –
आप किसी से प्यार क्यों करते हो? क्या उनके गुणों के लिए या मित्रता या अपनेपन के कारण?
इसका उत्तर ये होगा कि यदि हम महसूस किए बिना केवल गुणों के लिए हम किसी से प्यार करते हैं तो इस प्रकार का प्रेम प्रतिस्पर्धा और ईर्ष्या की भावना लाता है और जब प्यार आत्मीयता के कारण होता है तब ऐसा नहीं होता है। क्यों कि जब हम गुणों के लिए प्यार करते हैं तो जब गुणों में बदलाव आयेगा तो हमारा प्यार बदल जाता है परन्तु यही प्यार यदि अपनत्व के भाव से किया है क्योंकि वे हमारे अपने है तब वह प्यार जन्मजन्मातरों तक रहता है। “यदि प्यार निष्काम भाव से किया गया है तब तो” प्यार में सब जायज है शब्द सही है” जहाँ काम की भावना आ गई वहां प्यार में सब जायज शब्द गलत है।
वही बात जंग को लेकर कहेंगे यदि अपने स्वार्थ के परे होकर जंग कर रहे हैं तो” जंग में सब जायज है यदि अपने स्वार्थ के लिए जंग कर रहे हैं तो यह शब्द जंग में सब जायज है गलत है। हम ऐसा मानते हैं।
रजनी अजीत सिंह 13.3.18

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