जिंदगी में मन की बातें।

मन की बातें सभी मन में ही रह गई।
कोई पूछा नहीं हम बताते रहे तुम्हे समझने की हसरत, हससरत रह गई।
बातों का शिलशिला कुछ ऐसा रहा न तुमने कहा न हमने सुना, बस सुनने सुनाने की चाहत अब बदल सी गई।
अपनापन दिया फिर पराया किया, हम अपने भी हैं या पराये रहे ये समझने की कोशिश, कोशिश ही रह गई।
खुद को भी भुलाये बैठे हैं तुझे समझने के खातिर, अब मेरे प्यार के एहसास की डोरी अंतिम सांसो में दबी रह गई।
रजनी अजीत सिंह 10.3.18
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