जिंदगी में लेखनी के बोल। 

मेरी लेखनी तुम सब से  कुछ कहना चाहती है। 

शब्दों के सहारे से रिश्ते रूपी उन्मुक्त गगन में स्वछंद हो उड़ना चाहती है। 

मेरे कानों में शब्द रिश्तों के दरम्यान गुनगुनाते हैं। 

कभी हंसाते है कभी रुलाते हैं कभी जीवन का छुपा राज भी लिख जाते हैं।  

लखनी मेरी अवाज है, शब्दों का वो उपहार है  जो अनमोल है। 

कभी खुशी तो कभी गम लिए संसार में कैसे जीये  उसका भान कराती है। 

क्या आप शब्द रुपी संसार में विचरण करना नहीं चाहेंगे? 

“रजनी ” की लेखनी कुछ कहना चाहती है, तुम्हारे आस पास शब्दों के माध्यम से हमेशा साथ रहने का एहसास दिलाना चाहती है। 

रजनी अजीत सिंह 5.3.18
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