जिंदगी अकेले में। 


बाहों के घेरे में सिमट रहे हैं तेरे प्यार में हम तुम अकेले में।
दुनियां के मेले में सबको भुलाये बैठे बस तेरे चाहत में हम गुनगुनाने लगे अकेले में।
आज से फिर हम संवरने लगे तेरे नैनो के दर्पण में हम खुद को ही अच्छे लगने लगे अकेले में।
सूरज की किरणों सी बन रहे हमारा प्यार सदियों सदियों तक और एक-दूसरे पर जिंदगी वार दे सबकुछ निसार दे अकेले में।
रजनी अजीत सिंह 28.2.18
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