मन का भेद। 


मुझसे ही कोई अपना दर्द छुपाने लगा है।
दिखावटी खुशी का गीत गाने लगा है।
मेरे प्यारे एहसास को वो झुठलाने लगा है।
मुझे मिले जो खुशी तो खामोश भी होकर मुस्कुराने लगा है।
मुझसे ही मन का भेद छुपाने लगा है।
खुशियों का झूठा गीत गुनगुनाने लगा है।
रजनी अजीत सिंह 27.2.18
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