जिंदगी में अंतिम इच्छा। 

             (अंतिम इच्छा)

हे प्रभु मेरे पर बस इतना कृपा करना जब तन से प्राण निकले तब गोविंद का नाम लेकर निकले। जब प्राण निकले तब गंगा जी का तट हो और यमुना के किनारे वंशी बजाने वाला मेरा सांवरा मेरे निकट हो और वृंदावन वन का स्थल हो, विष्णु चरण का जल और मुंख में मेरे तुलसी दल हो।
जब प्राण तन से निकले तब मेरे सन्मुख मेरा सांवरा खड़ा हो और मुरली का स्वर भरा हो, तिरछा चरण धरा हो और जिसके सर मुकुट हो, मुखड़े पर काली लट हो बस प्राण निकलते समय मेरे हृदय में यही ध्यान हो, केशर तिलक लगा हो, उनके मुंख पर चन्द्रमा सा उजाला हो और मैं उन्हीं के गले में माला डालूँ। कानों में जड़ाउ बाली हो, जब भी देखूं छटा निराली हो। पीताम्बरी कसी हो और होठों पर कुछ हंसी हो और यही छवि मेरे मन में बसी हो। पंचरंगी काछनी हो पट प्रीत से तनी हो मेरी बात सब बनी हो। आना अवश्य आना राधे को संग लाना और मुझे उस वक्त भी अपना दर्शन दिखाना।
जब मेरे कंठ में प्राण आये तो मुझे कोई भी रोग न सतावे और न ही मुझे यम ही दरश दिखाए और मेरा प्राण सुख से निकले, तेरा नाम मुंख से निकले और इस आवागमन के घोर दुःख से बच जाऊं।
जब मेरे प्राण निकले उस वक्त जल्दी आना नहीं श्याम भूल जाना मूरली का धुन सुनाना। सुधि न तन की हो, तैयारी गमन की हो बस यही नेक सी अर्ज मेरी है मानो तो क्या हर्ज है मेरे प्रति कुछ तो आपका फर्ज बनता है।
रजनी अजीत सिंह 

4 विचार “जिंदगी में अंतिम इच्छा। &rdquo पर;

      1. इस भजन में मृत्यु के समय जो चीजें अच्छी होती हैं उनका वर्णन किया गया है। मृत्यु के समय गंगा का तट अच्छा माना जाता है इस लिए इसकी कल्पना की गयी है वैसे अगली लाइन में क्लीयर है कि यमुना का तट है वृदांवन में।

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