जिंदगी के यादों में खो जाते हैं। 

हम कुछ ऐसे बीते वक्त के यादों में खो जाते हैं जैसे बच्चे बाजार में खो जाते हैं।
तेरी बातों को भुलाना मुश्किल है धीरे-धीरे हम बातों को सोच ख्वाब में खो जाते हैं।
मैं अपनी न सही पर मेरे बातों पर भरोसा करना।
सब तो दौलत और रुतबे के नशे में हमें भूल जाते हैं।
मैंने दूसरे को अपना बनाया या उन्होंने मुझे अपना बनाया क्या फर्क पड़ता है? पर उन्होंने एहसान किया है मुझपर वे कुछ शाही टुकड़े डाल अपने अहम और वहंम में खो जाते हैं। ढूंढने रोज निकलते हैं हम अपनो का प्यार पाने को और रोज जलील हो सोचती हूँ होगी मुझमें ही कमी इसी ख्यालों में खो जाते हैं।
कौन तुझे मिलेगा तुझे जिंदगी में सब कुछ निसार करने वाला वजह यह है कि विश्वास इतना किया कि तेरे दिखावे के प्यार के भ़म में आ जाते हैं।
अपने हो या पराये सबकी सलामती चाही है उनका घर आबाद रहे यही दुआ कर हर दर्द को सह जाते हैं।
हमारे दर्द को सह जाने से घर बसता है तो हम दधीचि की तरह जां तक देने को तैयार हो जाते हैं।
रजनी अजीत सिंह 19.1.18
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