जिंदगी में रिश्ते। 

अभी रिश्ते तोड़ने से टूटे नहीं है।
रिश्तों को निभाने की अभी आस बाकी है।
रिश्तों में मिले झूठ से जख्म गहरे हैं।
मेरे जख्म पर मरहम भी लगेगा ये विश्वास बाकी है।
जब भी भूलना चाहती हूँ, बच्चों की किलकारी सी गूँजती है कानो में।
एक माँ की आस पूरी होगी कभी।
जब तक सांस तब तक आस मेरे अंदर ये विश्वास बाकी है।
रजनी अजीत सिंह 30.11.17
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