जिंदगी में अति से बचे। 


हर रिश्ते को प्यार से निभाने के लिए अहतियात बर्तना जरूरी है।
रिश्तों के टूट के विखरने के कारण है हद के पार जाना। यानी किसी भी चीज की अति या अधिकता हानिकारक है।
किसी ने ठीक ही कहा है –
ना अति वक्ता न अति चूप, न अति वर्षा न अति धूप।
रजनी अजीत सिंह
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5 विचार “जिंदगी में अति से बचे। &rdquo पर;

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