महीना: अक्टूबर 2017

जिंदगी में इंतजार 

रिश्तों को निभाने में जीने के लिए
चंद सांसे ही बची है।

जिंदगी में आँखों को बस यही इंतजार है,
खुशियों की बरसात कब होगी?

रजनी अजीत सिंह 

जिंदगी में बिटिया दमाद का साथ हो जाये तो  जिंदगी भी खास बन जाये। 25.10.17

जिंदगी में बिटिया दमाद का साथ हो जाये तो जिंदगी भी खास बन जाये। 

आपके जिंदगी में खुशियों की बहार ही बहार आये।
फूलों की खूशबू सदा श्रद्धा रूपी आंचल में छाये।
कामयाबी आपके कदम चूमती ही जाये।
हमारा आशीष है हर सुख समृद्धि आपके भाग्य में भागा चला आये।
सूरज की रोशनी जिंदगी को हमेशा रौशन करती ही जाये।
रजनी अजीत सिंह

    शुभ दीपावली 

दीपावली पाँच दिनों का त्योहार, मना लो खुशियाँ सब अपार। 

पहले धनतेरस, छोटी दिवाली और फिर आता बड़ी दीपाली का त्योहार। 

बनवास से लौटे थे श्री राम, अयोध्या में आयी थी खुशियां अपरम्पार। 

कहता शास्त्र जहाँ हो साफ सुथरा घर वार, वही होता लक्ष्मी जी का निवास। 

कार्तिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी हुआ नरक चतुर्दशी के नाम से ये विख्यात। 

गोवर्द्धन पूजा भी मशहूर जो आता दिवाली के सुबह हर बार, जो अन्नकूट नाम से है विख्यात।  

दीपावली के पाँचवा दिन भाईदूज का त्योहार, लगा रोली अक्षत का तिलक देती बहन उज्जवल भविष्य का आशीष। 

“रजनी ” ने किया छोटे में दीपावली का वर्णन सविस्तार, खुशियाँ लाये जीवन में अपार मुबारक दीपावली का त्योहार। 

        🎆🎆    रजनी सिंह 🎇🎇

जिंदगी में कलयुग में अंधकार। 


(23.8.97)

कलयुग में अंधकार था, तो सत्य के प्रकाश से “धर्मयुग” को भी आ जाना है।
क्यों कि एक को आना है तो दूसरे को जाना है।

ये प्रकृति का नियम है, टाले कभी प्रयत्न से भी टल सकता नहीं। व
सत्ययुग तो आ सकता नहीं, कलयुग भी अब टीक सकता नहीं। 

धर्म करने से “धर्मयुग” को आने से कोई रोक सकता नहीं। 

इंसान तो बिक सकता है, लेकिन भगवान् तो बिक सकता नहीं। 

ताकत तो बिक सकता है, लेकिन शक्तियाँ बिक सकती नहीं। 

औरत सतायी जा सकती है, नारी की श्रध्दा और त्याग मिट सकता नहीं। 

हंसी – खुशी भी  खरीदा जा सकता है, लेकिन सकूं चैन खरीदा जा सकता  नहीं। 

बेटी-बेटा, रिश्ते – नाते सब खरीदे जा सकते हैं। 

लेकिन स्नेह प्यार खरीदा जा सकता नहीं। 

पैसे से कुछ सामान कुछ बातें खरीदें जा सकते हैं।

लकीन जज्बात और विचार खरीदा जा सकता नहीं। 

थोड़ी सी रौशनी तो खरीदी जा सकती है। 

लकीन दिन का प्रकाश खरीदा जा सकता नहीं।
अंधकार भी खरीदा जा  सकता है, लेकिन  “रात” खरीदी  जा सकती नहीं। 

अन्त में रजनी कहती है , कुछ चीज खरीदा जा सकता है। 

लकीन दौलत से हर चीज खरीदा जा सकता नहीं। 

कुछ देर स्थायित्व तो खरीदा जा सकता है। 

लेकिन अमरत्व खरीदा जा सकता नहीं। 

 “धर्मयुग ” में सब कुछ ईश्वर से पाया जा  सकता है। 

लकीन दौलत से  सब कुछ खरीदा जा सकता नहीं। 

                       रजनी सिंह 

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जिंदगी में असत्य का अंधकार। 


आने वाले कल में सब असम्भव सम्भव होगा।असत्य काअन्धकार हटाने से सत्य का प्रकाश छा जाएगा। 

जैसे सावित्री ने सत्यवान का प्राण बचा वापस लाया था। 

वैसे ही किसी सावित्री का सत्यवान वापस आ जाएगा।
जैसे अर्जुन के प्रण के खातिर दिन भी ठहर गया था। 

वैसे ही किसी भक्त के खातिर दिन भी ठहर जाएगा। 

जैसे राम के तीर सभी को मार फिर वापस आ जाता था। 

वैसे ही किसी वीर योद्धा का तीर तरकस में वापस आ जाएगा। 

जैसे वाल्मीकि भटके थे राह दिखाने  से ही वापस आ पाए थे। 

वैसे ही  भटके हुए व्यक्ति राह दिखाने से वापस आ पायेगें। 

यही साधना  मेरी है यही प्रयत्न मेरा है। 

जब ये कथन सत्य होगा तब प्रकाश आ जाएगा। 

जब असम्भव सम्भव होगा तभी ये मन सुख पाएगा।  

जब प्रयत्न सफल होगा तभी साधना पूरा हो पायेगा।

नहीं तो सदियों – सदियों तक यही संघर्ष चलता जाएगा। 

हम मिटेगें कोई और आयेगा राह वो भी दिखाकर ही जाएगा। 

देखे कब तक मिटेगें मिटने वाले, देखे कब तक जीतेंगे जीतने वाले। 

देखे कब तक असत्य का राज्य चलेगा। 

देखे कब तक सत्य पराजित होता चलेगा, 

स्वार्थ समर में अपने लिए। 

                  रजनी सिंह 

जिंदगी में रिस्ता जज्बातों का। 

हो चला खत्म रिस्ता जज्बातों का,

 क्या जवाब दें उनके सवालातों का। 

मगर क्या करें, उनके हालातों का। 

हो चले हम कुछ इस कदर परेशां, याद आया वो मौसम मुलाकातों का। 

      रजनी अजीत सिंह