जिंदगी में प्रेम नहीं तो कुछ नहीं। 

अक्टूबर 28, 2017 को 4:25 अपराह्न

प्राईमरी स्तर को मध्येनजर रखते हुए सरल शब्दों में लिखी गयी ये कविता वाकई बेहतरीन है।पहले भी इस कविता को पढ़ा था परंतु इस बार मन मे कुछ भाव आये शायद आपको पसंद आये—-
प्रेम नही तो ये जग कैसा?
प्रेम बिना फिर रब है कैसा?
प्रेम ही काबा,प्रेम ही काशी,
प्रेम जहां फिर कहाँ उदासी।
आओ प्रेम का दीप जलाएँ,
धर्मयुग फिर वापस लाएँ।
जहां नही डर छल का होगा,
भयमुक्त जग-जन्नत होगा।
हर रिश्ते में प्रेम पाक,
अपवित्र प्रेम का लफ्ज ना होगा।

कवि- मधुसूदन जी

रजनी अजीत सिंह
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4 विचार “जिंदगी में प्रेम नहीं तो कुछ नहीं। &rdquo पर;

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