जिंदगी में खुशी 


यदि मन खुश और सन्तुष्ट हो तो सभी की शक्ल प्यारी लगती है। 

मगर जब सच्ची बातें करती हूं तो लोगों को लगता है,

 मेरी बातों से चिनगारी निकलती है। 

लबो पर मुस्कुराहट हो तो सच्ची मुस्कुराहट  और दोस्त की जोड़ी प्यारी लगती है। 

पर जब सच्ची बातें कहो तो न समझने की अक्सर  बिमारी निकलती है। 

सच्ची बातें तो सब पर जबर्दस्ती लादा जा नहीं सकता। 

कहीं स्वार्थ और झूठ के नींव पर मेरी जान रिश्तों की ऊंची ईमारत बनती है। 

जब स्वार्थ सिद्ध करने का समय आता है तो मिलजुल कर सब बातें करते हैं। 

अब कलयुग में दौलत से ही सबकी बस अपनी रिश्तेदारी निकलती है। 

किसी को बचाने की बात हो तो कलयुग में झूठ बोलना पाप नहीं। 

लेकिन यहाँ तो सब अपने स्वार्थ के लिए, झूठ बोलकर तेरी मेरी जां लेने की सबकी तैयारी लगती है। 

मेरी जुबां खुलते ही फौरन टूट जाएगा कबीला। 

यदि खामोश रहती हूँ तो सबकी जबाब देही होती है। 

तबीयत से जिसे भी चाहा अपनाना वो खूनी रिस्ता पराया निकलता है। 

खूनी रिश्तों में जो अपना लगता है वो रिस्ता अक्सर बाजारी निकलता है। 

बेहतर है अपने खून के रिश्तों से पराये रिश्ते। 

कम से कम प्यार के दो शब्दों से जख्म पर मरहम तो लगा जाता है। 

जिंदगी में खुश रहना है तो” रजनी ” के जीवन साथी खूनी रिश्तों को छोड़ पराये को अपनाने का हुनर सीख लो मेरे प्यारे। 

” रात” के हमराही के जिंदगी में भी खुशियां छा जाएंगी। 

  🌺 🌺 जय माँ कल्याणी 🌺🌺

    ☺️   रजनी  अजीत सिंह

3 विचार “जिंदगी में खुशी &rdquo पर;

  1. यदि मन खुश और सन्तुष्ट हो तो सभी की शक्ल प्यारी लगती है। 

    मगर जब सच्ची बातें करती हूं तो लोगों को लगता है,

     मेरी बातों से चिनगारी निकलती है। 

    सत्य कड़वा लगता ही है।बहुत ही खूबसूरती से लिखा है।

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