जिंदगी के आँखों में आँसू नहीं अब अंगारे। 

अब मेरे आँखों में आँसू नहीं, आग बरसने वाले अंगारे होंगे।

जिंदगी में अब ओठों पर हंसी ही नहीं,
जिंदगी में खुशी भी होगी।

अब जिंदगी में अपने रिश्ते पराये रिश्तों की खुशियों के लिए बलि चढ़ेगी।

अब मेरी सारी उम्र खूनी रिश्तों से हटकर बस इंसानियत के लिए कुर्बान होगी।

रजनी अजीत सिंह