जिंदगी की कहानी गीत, गानों,  तस्वीरों और कविताओं के साथ कहानी अपने जमाने की भाग – 13

1997 की बात है ये  यू. पी. कालेज की बात है। मेरा फाइनल ईयर था। उदय प्रताप कालेज के प्रवक्ता हमारे गुरु जी रामबच्चन सर का रिटायर होने के उपलक्ष्य में पार्टी रखी गई थी और डॉ. शिवप्रसाद सिंह जैसे प्रसिद्ध साहित्यकार का सेमीनार भी था जिसका आयोजन हम और सहपाठियों ने किया था।

प्रसिद्ध साहित्यकार शिवप्रसाद सिंह से मिलने का इतने करीब से मिलने का मौका मिलेगा कभी सोचा भी नहीं था। बचपन में हाई स्कूल में इनकी रचना  कर्मनाशा की हार पढ़ा था तब एक लेखक के नाम से जानते थे। इनका जन्म बनारस जिले के जलालपुर गांव में हुआ था। इनकी शिक्षा उदय प्रताप कालेज से इंटरमीडिएट और बनारस विश्व विद्यालय से बी. ए. और हिंदी से एम.ए किया था। 1990 में इन्हें साहित्य आकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 

मैंने भी उदय प्रताप कालेज से बी.ए.  और हिंदी से एम. ए किया है। तो हिन्दी के प्रवक्ता डॉ. विश्व नाथ सर, डॉ राम सुधार सर के सहयोग से डॉ. शिव प्रसाद सिंह को बुलाया गया था। सेमीनार और रामबच्चन सर के रिटायर्ड होने के उपलक्ष्य में पार्टी आरम्भ हुआ हमारे गुरु जी लोगों ने भाषण दिया सभी सहपाठियों ने जिसे जो आया पेश किया। मैं बीच में बैठी थी इसलिए मेरी बारी आने में वक्त लगना था इसलिए मैं कुछ नया करने को सोच रही थी मैं इस कविता को मात्र 5या 10मिनट में लिखी थी जो इस प्रकार है – 

           

                अंधकार 

छाया  है अंधकार वो अंधकार तो छट जाता। 
पड़ा है आँखों पर पर्दा वो पर्दा तो हट जाता। 

समाज के राहों में कांटे ही कांटे है, फूल तो विछ जाता। 

किसे फूल कहूं किसे कांटे ये समझ नहीं आता। 

कांटो में ही फूल भी खिला करते हैं। 

लेकिन हम उन कांटो की बात करते हैं, 

जो कंटिली झाड़ियां है जिसमें फूल नहीं खिला करते। 

इन कंटिली झाड़ियों का भी अपना अस्तित्व है। 

लेकिन इसकी छटा वनो में है, ये उपवनों में शोभा नहीं पाया करते। 

लेकिन आज के दौर में कांटे ही सजाए जाते हैं, 

गमलों में सजाए जाते हैं, उपवन में लगाए जाते हैं। 
कांटो के साथ  फूल खिलाना थोड़ा मुश्किल है। 

इसीलिए अलग से कांटे लगाए जाते हैं। 

अलग से फूल भी खिलाए जाते हैं। 

लेकिन कांटो में रहने वाले फूल अब थोड़ा कम ही खिला करते हैं। 

जब मेरी बारी आई तो अपना रचित कविता सुनाई सबने तालियों से स्वागत किया और शिवप्रसाद सिंह ने इस कविता पर अपना आटोग़ाफ भी दिया और कहा कि तुम्हारे हाथ में कविता लिखने की क्षमता और गुण है जो तुम्हारे लिए सरस्वती का वरदान है। अफसोस मेरे पास वो आटो ग़ाफ वाली डायरी नहीं है वर्ना मैं जरूर शेयर करती। शिव प्रसाद सिंह की जब मृत्यु हुई तो ये समाचार सुनकर बहुत दुख हुआ इनकी मृत्यु 28 सितम्बर 1998मेंहुआ लेकिन अन्दर इस बात का सन्तोष था कि हमने उनसे इतने करीब से उन्हें देखा और मिला था। मैंने उनके साथ अपने सहपाठियों का अपने कैमरे से जो तस्वीर ली थी उसे शेयर करती हूँ। 

लेकिन दुर्भाग्य ये है कि उस समय सेल्फी का जमाना नहीं था इसलिए मेरा तस्वीर उनके साथ नहीं है। अभी मैं किसी से फोटो क्लिक कराने के चक्कर में थी की उनका जाने का समय हो गया और वो चले गए। 

            इसी के साथ आगे की कहानी भाग 14 में। 

                      रजनी सिंह 

9 विचार “ जिंदगी की कहानी गीत, गानों,  तस्वीरों और कविताओं के साथ कहानी अपने जमाने की भाग – 13&rdquo पर;

  1. एकाएक इतनी सुंदर कविता लिखना वह भी दिग्गज लोगो के साथ बैठकर काबिलेतारीफ।मैं क्या तारीफ करूँ आपकी कविता की।बहुत बढ़िया है।मुझे तो ऐसे समय मे शब्द ही भूल जाता है।

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    1. ठीक कहा है अंसारी जी। मैंने अपने जीवन में घटने वाली घटनाओं को ही 13 भाग में लिखा है जो मेरे जिंदगी से जुड़ी हुई है। कभी टाइम मिले तो पूरा भाग पढिएगा तब बताइएगा कैसा लगा। आप पढेंगे तो मेरे विचारों को समझ सकेंगे।

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