हिंदी दिवस पर हिंदी को माँ बनाती हूँ।( 14.9.17)

न पोयम बनाती हूँ न स्टोरी सुनाती हूँ,

आज हिंदी दिवस पर थोड़ा सा कविता बनाती हूँ और कहानी सुनाती हूँ। 
न अंग्रेज हूँ कि अंग्रेजी है मुझे आती, न फ़ास की रहने वाली की फे़च है आती। 

हम हिन्दुस्तानी ठहरे अच्छे  से हिन्दी लिख, पढ़ और बोल लेते हैं। 

आजकल हिन्दुस्तान भी इंग्लिश बोलने के खातिर मशहूर है होता। 

कोई इंग्लिश को अपनी गर्लफ्रेंड बना लेता। 

मैं ठहरी हिन्दुस्तानी हिन्दी को माँ बना लेती। 

अंग्रेजों की हुकूमत अंग्रेजी भाषा बोलने सीखाना था।

मगर मुझे हिन्दुस्तान में हिन्दी मशहूर हो कैसे ये सीखना सीखाना था। 

मेरे हिन्दुस्तान की गलियों गलियों में तमन्ना है हिन्दी बने सबकी मातृ भाषा। 

मगर भारतीय तो ऐसे हैं जो इंग्लिश बोलना सीखता सीखलाता है। 

सजा कितनी बड़ी मिली गांव शहर से बाहर निकलने की। 

मेरी माँ हिन्दी सीखाती थी अब मैं बच्चों से इंग्लिश पढती और सीखती सिखाती हूँ। 

हिन्दी दिवस पर चन्द घंटों के खातिर इंग्लिश पर हिन्दी भारी है पड़ती। 

मैं तो देखती हर रोज  भारतीयों को अपनी संस्कृति और खाना भी नहीं भाता। 

भारतीय अपने बच्चों को पाश्चात्य संस्कृति और पीजा, वर्गर और चाइनीज खाना खाने है सिखाता। 

बस इतना सा इल्तिजा है हिंदुस्तानी लोगों से की हिन्दुस्तान से मुझे इंग्लिशतान न करना। 

हर हिन्दुस्तानी को गर्व से हिन्दुस्तानी होने का पाठ पढाती हूँ। 

मुझे तो शहर और इस देश के लोग हिन्दी बोलने से गंवार है कहते। 

मगर हम बच्चों को शान से हिन्दुस्तानी कह हिन्दी सिखाते हैं। 

      🇮🇳 रजनी सिंह 🇮🇳

11 विचार “हिंदी दिवस पर हिंदी को माँ बनाती हूँ।( 14.9.17)&rdquo पर;

  1. वाकई आपने अनगिनत भाव पिरोएं हैं इस कविता में।हिंदी दिवस के अवसर पर न जाने कितने पाठ पढ़ा दिया अपने देहवासियों को।सच में अगर हम हिंदी छोड़े तो संस्कृति से कोसों दूर चले जाएँगे जो कि आपने अपनी कविता में सुंदरता से वर्णन किया है।

    इंग्लिश तेरी दुल्हन होगी,
    हमें नाज है हिन्दी पर,
    हिंदुस्तान के हम वासिंदे,
    नाज हिन्द और हिंदी पर,
    छंद रसीले अलंकार हैं,
    उपमा का भी क्या कहना,
    बोल के देखो हिंदी प्यारे,
    सारे देश का है गहना,
    झरनों के कलकल पानी,
    बारिश के बूंदों में हिंदी,
    जीव-जंतु के बोल सुनो,
    लगता है बोल रहे हिंदी,
    गावो के खलिहान,शहर,
    संसद को शान है हिंदी पर,
    हिंदुस्तान के हम वासिंदे,
    नाज हिन्द और हिंदी पर।
    जय हिंद —जय हिंदी।

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    1. धन्यवाद मधुसूदन जी आपको। आप बहुत ही बारीकी से पढते हैं। और हमारे ब्लॉग को इतना अच्छा कविता से सजाया है कि मेरे पास तो शब्द ही नहीं है तारीफ करने के लिए। 👌👏💐👍🇮🇳

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