मीरा ने घर बार है छोड़ा 6. 9.17

मीरा ने घर बार है छोड़ा जग से नाता तोड़ दिया। 

एक धनवान की बेटी ने गिरधर से नाता जोड़ लिया। 

हरे रामा, हरे रामा, हरे कृष्णा हरे हरे – 2

विष का प्याला राणा जी ने भेजा मीरा ने स्वीकार किया, 

अमृत समझ के पीवे मीरा जब गिरधर का नाम लिया। 

हरे रामा हरे रामा हरे कृष्णा हरे हरे। – 2

सर्प पिटारा राणा जी ने भेजा मीरा ने स्वीकार किया। – 2

माला समझ के पहन ली मीरा जब गिरधर का नाम लिया। 

हरे रामा हरे रामा हरे कृष्णा हरे हरे। 

फांसी का फंदा राणा जी ने भेजा मीरा ने स्वीकार किया। 

झूला समझ के झूले मीरा जब गिरधर का नाम लिया। 

हरे रामा हरे रामा हरे कृष्णा हरे हरे। 

मीरा ने घर बार है छोड़ा जग से नाता तोड़ दिया। 

एक धनवान की बेटी ने गिरधर से नाता जोड़ लिया। 

हरे रामा हरे रामा हरे कृष्णा हरे हरे। 

               रजनी सिंह 



16 विचार “मीरा ने घर बार है छोड़ा 6. 9.17&rdquo पर;

    1. मैं भी हिंदी साहित्य से ही एम. ए. किया है तभी माँ बेटे के विचारों का आपस में ताल मेल है। अच्छा लगा कि आप हिन्दी साहित्य के विद्यार्थी हैं।

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