जन्माष्टमी पर हार्दिक शुभकामनाएं। 

सबसे पहले कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्यारी सी नोकझोंक होने के बाद भाई बने अजय जी, शिक्षा के क्षेत्र में लगभग सभी जानकारी को को पास रखने वाले प्रतिभा के धनी व्यक्ति जिन्हें मैं मन से गुरु मान चुकी हूं अभय जी, और हर क्षेत्र में हर टॉपिक पर प्यारा – प्यारा कविता पढ़ने का आनंद देने वाले मधुसूदन जी , ए. वी. जी उन्मुक्त जी, रोहित जी, अश्विनी जी,  विजय जी, मेरे विचारों का साथ निभाने वाले पवन भाई जो मुझे प्यार से दी कहते हैं और एक महीने के अंदर मेरे शब्दों और विचारों से काफी प्रभावित हैं।   विमला जी,नागेश्वर जी,अतुल जी, गौरव जी, गौरी जी, राज जी,  अभी राज जी  अतुल जी  मेरे बेटे भवराज और मेरे बातों को बखूबी मनाने वाले प्यारे बेटे दानिश अंसारी जी ,  अशायरी की दुनिया में बेहतरीन शायरी लिखने वाले सागर जी, पाखी जी। कात्यायनी जी, गीरजा जी,मेरी ब्लॉग की प्यारी बेटी ज्योति जीऔर वेरोनिका जी, मेरी प्यारी बहन काँची जी, वर्डप्रेस के सभी पाठकों और लेखनी की दुनिया में लिखने वाले भाई – बहन, बेटा – बेटी और सह मित्रों को जन्माष्टमी की बधाई हो। मैं बताना चाहती हूँ कि मैं 2,1,17कोअपना ब्लॉग बनायी थी यानी आठवां महीना चल रहा है इतने दिनों के साथ में मेरे 319फालोवरस हो गए हैं। मैं चाहती तो केवल पाठक मित्र कहकर ही जन्माष्टमी की बधाई दे सकती थी परन्तु मुझे वर्डप्रेस एक परिवार जैसा लगता है इस लिए मैं देख रही थी कि मुझे अपने परिवार के कितने सदस्यों का नाम याद है। तो मैं अपना पहला पोस्ट नये साल की नई उम्मीद लिखी थी वो कविता बताती हूँ जो इस प्रकार   है – 

अरे! नये साल में नयी उम्मीदें लेकर आया नया साल।

अरे! सबको बधाई नये साल की, मम्मी – पापा ,भाई-बहना, दीदी-जीजा, चाचा-चाची बेटी-बेटा सबको ही।

अरे! जो साथ रहे हैं उनको भी, जो दूर रहे हैं उनको भी, जो देश में है उनको भी, जो विदेश बसे हैं उनको भी।

  अरे! जो दोस्त बने हैं उनको भी, जो बिछड़ गए हैं उनको भी।अरे! सबको बधाई-सबको बधाई मेरी तरफ से सबकोबधाई।

हम कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर अपने पति यानी लाईफ पार्टनर के विचारों को भी बतना चाहती हूं। हम दोनों का अरेंज मैरिज है। हम दोनों को ही परिवार के लोगों ने ही एक दूसरे को पसंद किया है। हम लोगों ने एक दूसरे को देखा तक नहीं था मैं सबसे पहले इनसे प्रेमिका और पत्नी में फर्क पूछा था। हो सकता है ये विचार औरो के लिए गलत हो पर मुझे इनके विचारों ने काफी प्रभावित किया। इन्होंने

प्रेमिका और पत्नी का फर्क केवल कुछ शब्दों में स्पष्ट किया था। इन्होंने ने कहा था आज के जमाने में प्रेमिका का स्थान तब तक कायम रहता है जब तक प्रेमिका को पा न लें और पत्नी का स्थान प्यार पाने के साथ ही शुरूआत होती है और वो प्यार अजान होकर भी समर्पण भाव से एक अटूट बंधन में कई जन्मों तक बंध जाता है।

 मैं आज इतने कम समय में जहाँ भी हूँ  इनके सहयोग और प्यार के बदौलत हूँ। वर्डप्रेस, फेसबुक और ट्विटर पर अकाउंट बनाना मेरे फैमिली को पंसद नहीं है विशेषकर मेरे मायके वाले पापा जी को। परन्तु इन्होंने मेरा साथ देने के लिए लिखित फरमान जारी किया। ताकि किसी को विरोध न हो। वो डायरी पर लिखा फरमान शेयर करती हूं। 

इसी तर्ज पर कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सबको बधाई हो।  

समय अभाव के कारण मैं भजन और सोहर इसके भाग 2में लिखूंगी। 

8 विचार “जन्माष्टमी पर हार्दिक शुभकामनाएं। &rdquo पर;

  1. dhanwaad ji or apko sath hi apke pure pariwaar jano ko krishna janmashtmi ki hardik shubhkamnaye apki kahani jaan kar mujhe bahut achha laga sath apki purani tasveer dekh main bilkul aashcharyachakit reh gaya aap kitni khubsurat hai waise ab kuch kam nahi hai waise bhi umr ke sath tazurba or khubsurati badhti jati hai ye or baat hai ki log apki khubsurti kis nazariye se dekhna chahte hai sirf chehre ki ya fir dil ki bhi

    ek baar fir aapko bahut bahut aabhar

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    1. धन्यवाद अंसारी जी। पर माफ कीजिएगा शब्दों पर ध्यान देती हूँ दिल की खूबसूरती के जगह आप मन की खूबसूरती कह सकते हैं। दिल में मेरे केवल पति रूपी देवता बसते हैं इसलिए इस दिल की खूबसूरती देखने और इसमें बसने का हक केवल इनके लिए है। मैं जानती हूँ कि आम भाषा में दिल शब्दों का ही प्रयोग करते हैं। परन्तु कुछ शब्दों का अर्थ मैं अपने हिसाब से लगाती हूँ। जैसे मैं यह कभी नहीं कह सकती की मैं आपको दिल से बेटा मानती हूँ इसके जगह मैं ये कहूँगी की मैं मन से आपको बेटा मानती हूँ। मैं एक पतिव्रता स्त्री हूँ इस लिए उम्र और शब्दों का बहुत ही ध्यान देती हूँ।

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