~जिंदगी की अनमोल घड़ी 22.6.17

समय आ गया विदा वेला की घड़ी। 

प्रार्थना सी, आरती सी हो तुम्हारी विदा वेला की घड़ी। 

प्रेम है अनमोल से ये कथा सुन हुए नैन गीले। 

गीत अनमोल के राग प्रेम से तेरे अनमोल विरह और क्षण मिलन के। 

पा लिया जिसने सभी प्रेम स्वर, पंक्षी बन उन्मुक्त गगन में। 

साथ था जिस अनमोल समय का, सृजन बन बार – बार खेला। 

आज करले अनुमान सुख का, आ गयी अनमोल की विदा की घड़ी। 

छोड़ दो अनमोल प्यार समय का, सत्य का उपहार लेलो। 

याद न कर अब अनमोल समय की, रोग, व्याधि अब ज्वर है चढ़ता। 

है पता तेरे अनमोल रिश्ते, है पवित्र दूध सा अनमोल मधु जल में भिगोई। 

आँसुओं की धार बन गई तेरी प्यार रागिनी पल भर न सोई। 

कंठ से निकला हुआ संदेश मेरा, लेखनी से लिखी कविता हमारी। 

यह रजनी का अनमोल को उपहार है, क्योंकि समय आ गया विदा वेला की घड़ी।

          अनमोल घड़ी की साक्षी माँ 

                        रजनी सिंह 

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