वैष्णो धाम की यात्रा का वर्णन (10.4.17)

  • हम लोगों (पापा, भाई-बहन, पति-पत्नी, और हमारे कम्पनी के चार सदस्यों) के बीच वैष्णो देवी की यात्रा का प्लान बना। हम लोगों ने वाराणसी से यात्रा आरम्भ कर दिल्ली होते हुए जम्मू आने के बाद कटरा से वैष्णो धाम की यात्रा शुरू किया जो काफी सुखद यात्रा रहा। उसी यात्रा के बारे में वर्णन करुंगी जो काफी रोचक है। यहां पर सबका नाम  उपनाम  है। बहुत कुछ हमारे आसपास घटता है जिसे हम गौर करें तो शब्दों की सहायता से उसको व्यक्त कर सकते हैं। 

चलिए अब हम आपको अपने किये गये यात्रा से अवगत कर आपको भी शब्दों की सहायता से मन से यात्रा कराती हूं जो बहुत ही चंचल है कहीं भी जा सकता है पर थोड़ा सा पढ़कर ध्यान एकाग्रचित किया जा सकता है हम लोगों को 10तारिख को सुबह – सुबह निकलना था क्योंकि हम लोगों की फ्लाइट दिल्ली के लिए 9.20 की थी। अब जब ग़ूप में जाना था तो सब को एक जगह पर आना था और वह जगह था मेरा घर। अब मैं सुबह जल्दी उठी क्यों कि दो लोग रात को ही आ गये थे जिनका नाम रिंकू और डींपू है जो रिश्ते में देवर लगते हैं और हमारे कम्पनी में कार्यरत हैं। रिंकू जो अकबरपुर (अम्बेडकर नगर में) M. R. है और मेरे चचेरे देवर भी हैं। डींपू ये मेरे कम्पनी में पहले M. R. रह चुके हैं और अब वर्तमान में ठीकेदारी करते हैं अकबरपुर में जो मेरे फूफेरे देवर हैं इन दोनों की प्लेन से पहली बार यात्रा  थी। मेरे पापा जो बनारस के वरिष्ठ अधिवक्ता है। अजू जो सृजन फार्मा के एम. डी.। मैं जो सृजन फार्मा की डायरेक्टर। राजन, (एलआईसी) दीपू, (अधिवक्ता) सन्तोष, (सृजन फार्मा के मैनेजर) और निक्की जो दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट है जिनका डिफेंस कॉलोनी में अपना चेम्बर है। इन्होंने ने ही हमारे घूमने की सारी व्यवस्था की थी। कुल मिलाकर हम लोग 9थे। जिसमें से आठ लोगों को बनारस एयरपोर्ट के लिए रवाना होना था। 

सफर और घूमने का आनंद तब आता है जब समान कम हो इसलिए  सबके हाथ में एक हैंड बैग था ताकि समान साथ जा सके और लगेज में न डालना पड़े। और तब हम लोग एयरपोर्ट से चेकिंग करा बोर्डिंग पास ले दिल्ली के लिए रवाना हुए और दिल्ली पहुंचे जहां पर निक्की मिले। हमलोग दिल्ली एयरपोर्ट के बाहर निकले तो निक्की ने नास्ता की व्यवस्था की थी तो हम लोग जलपान वगैरह कर फिर दिल्ली एयरपोर्ट पर चेकिंग करा बोर्डिंग पास ले जम्मू के लिए रवाना हुए। आनलाइन जम्मू में होटल, गाड़ी , वैष्णो देवी के लिए जो दर्शन करने के लिए टिकट लगता है सब निक्की ने बुक कर रखी थी। अब  हम लोग जम्मू पहुँच कर दो अलग – अलग गाड़ी पर सवार होकर कटरा में स्थित होटल के लिए प्रस्थान किया। 

हम लोगों में से कुछ लोगों का विचार था कि चढ़ाई शाम को ही शुरू किया जाय और कुछ लोगों का विचार था कि रात को विश्राम कर सुबह से चढाई शुरू किया जाय। लास्ट में सबकी सहमति से सुबह चढ़ाई के लिए 4 बजे समय तय हुआ। इस लिए सब अपने – अपने कमरे में सोने चले गये। अब मेरे पापा जी समय के पाबंद और काफी चुस्त – दुरुस्त और बहुत ही मेंटेन और फूर्तिले हैं। अब जैसा कि हमने बताया कि पापा जी समय के पाबंद है उसी अनुसार अपने सहयोगी दीपू जी की सहायता से सबके कमरे में दस्तक दे 3 बजे उठा दिये गये हम लोग। अब भला 3 बजे सुबह किसका मन करेगा अपना नींद खराब करना पर पापा जी का लिहाज और मां के दर्शन की उत्सुकता ने इतनी सुबह सभी को उठने पर मजबूर कर दिया। अब हम लोग जल्दी – जल्दी नहा धोकर तैयार हो होटल के नीचे काउंटर पर एकत्रित हो होटल की गाड़ी से जहाँ से चढ़ाई करना था वहाँ के लिए रवाना हुए। 

अब हम लोगों को चढ़ाई शुरू करना था। अब  सबका अपने – अपने चाल के हिसाब से दो या तीन के ग़ुप में हमारा  टीम बंट गया।  हम लोगों की बारी थी चढ़ाई शुरू करने की। चुकि आनलाइन पर्ची थी इसलिए लाइन में लगने से बच गए। अब मैं जानती थी कि पापा जी सबसे पहले चढ़ाई कर लेंगे वैसे जैसे तैसे हम पति-पत्नी चढ़ाई कर लेते पर मेरा दो दिन पहले ही बी. पी. लो हो गया था इसलिए ये मन ही मन डर रहे थे और दूसरा हमारा मोटापा जिसकी वजह से चढ़ाई अराम अराम से ही कर पाते। अब जब साथ  थे तो चढाई  पूरी कर साथ  अर्धकुमारी तक पहुंचना भी आवश्यक था इसलिए मैं और ये घोड़ा तय कर अर्धकुमारी तक की दूरी तय करने का फैसला किया। 

ये तो हर साल वैष्णो देवी की दर्शन करने जाते हैं परंतु मैं दूसरी बार जा रही थी। सन् 200 में दर्शन करने गयी थी। उस समय मेरी उम्र 24या 25 की रही होगी। उस समय मेरा बड़ा  बेटा मात्र छे या सात महीने का था जिसे लेकर हम लोग पैदल ही चढ़ाई चढ़ी थी। आज से 17 साल पहले हमने यात्रा के दौरान बच्चे को लेकर इतनी परेशानी उठाया था कि हमने विचार बना लिया था कि अब जब बच्चा बड़ा हो जाएगा तभी वैष्णो देवी की दर्शन करने दोबारा आउंगी। 17साल में काफी कुछ बदल गया है। रास्ते भी अलग हो गए हैं। किन्तु अर्थ कुमारी तक घोड़े, पालकी, पैदल यात्रा सबके लिए एक ही रास्ता है जिससे पैदल यात्रा के दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अब बैट्री वाले आर्टो भीअर्धकुमारी से चलने लगे हैं जिसके कारण अर्थ कुमारी से वैष्णो देवी की दूरी तय करना काफी आसान हो गया है। अब पहले के मुकाबले सफाई काफी थी लेकिन यात्रियों की लापरवाही की वजह से जगह – जगह डस्टबिन होने के बावजूद भी कूड़ा बाहर दिख रहा था। 

तो मैं बता रही थी कि अर्धकुमारी जब पहुंची तो हम दोनों लोग घोड़े से थोड़ा पहले ही उतर गए ताकि हम दोनों लोग मजाक में बताए की पैदल आ गए किन्तु मेरे पापा जी बिना कहीं रूके चढाई चढ़ पहले से अर्धकुमारी हाजिर थे।

अब हम पांच लोग साथ थे। हम पांचों ने सुबह की चाय साथ पी और निकल पड़े अपने – अपने रास्ते। अब हम दोनों ने तीनो की चढ़ाई की स्पीड को देखते हुए हम दोनों ने आर्टो से जाने का निर्णय ले टिकट के लिए लाइन में लग गए। बड़ी मुश्किल से दो घंटे बाद टिकट मिला। तब तक मोबाइल से सूचना मिली कि पापा जी भाईऔर राजन तीन लोग ऊपर चढ़ाई कर पहुंच चुके हैं अब हम दोनों भी सोचने पर मजबूर हो गए कि लाइन में खड़े होने से अच्छा था कि स्वयं ही चढ़ाई कर लिया होता। लेकिन हम दोनों 20,25,मिनट के अंतराल पर पहुंचे और उसके बाद एक के बाद एक सभी एकत्रित हो लाकर में समान रख प्रसाद ले दर्शन के लिए लाइन में खड़े हो गए। दर्शन करने के लिए गुफा में जाने के तीन रास्ते हो गए हैं। सुबह का समय था इसलिए भीड़ नहीं थी और दर्शन बड़े अच्छे से हो गए और जहां प्रसाद मिलता है वहीं पर इकट्ठा हो जलपान किया और अब उतरने की बारी आई। पापा भाई एक साथ और हम सात लोग एक साथ उतर रहे थे।चुकी समय और साथ की पांबदी थी नहीं इस लिए हम दोनों भी पैदल ही उतरे। साढ़े तीन घंटे में हम लोग नीचे उतर आए। और इस तरह माँ के दर्शन हो गए। चलिए माँ वैष्णो देवी से रिलेटेड गीत सुनाती हूं_

                  गीत 

 मैं तो चढ़ गई माँ तेरी चढ़ाईयां-2

तेरी चढ़ाईयां-2तेरी चढ़ाईयां माँ 

मैं तो चढ़ गई माँ तेरी चढाईयां-2

जब मैं पहुंची कटरा नगरिया – 2

मिल गई माँ सखियाँ – सहेलियाँ – 2 

मैं तो चढ़ गई माँ तेरी चढाईयां। 

तेरी चढाईयां – 2तेरी चढाईयां माँ 

मैं तो चढ़ गई माँ तेरी चढाईयां 2

जब मैं पहुंची बाण गंगा – 2

धूल गई माँ  सारी बुराइयां – 2 

मैं तो चढ़ गई माँ तेरी चढाईयां। 

जब मैं पहुंची चरण पादुका – 2

मिल गई माँ तेरी निशानियां। 

तेरी निशानियां – 2 तेरी निशानियां माँ। 

मैं तो चढ़ गई माँ तेरी चढ़ाईयां। 

जब मैं पहूंची अर्धकुमारी – 2 

मिल गई माँ कन्या रूप में। 

मैं तो चढ़ गई माँ तेरी चढाईयां 

तेरी चढ़ाईयां 2 तेरी चढाईयां माँ। 

मैं तो चढ़ गई माँ तेरी चढाईयां। 

जब मैं पहुंची वैष्णो नगरिया – 2

मिल गयी माँ पिंडी रूप में – 2 

मैं तो चढ़ गई माँ तेरी चढ़ाईयां – 2

तेरी चढ़ाईयां – 2तेरी चढ़ाईयां माँ। 

मैं तो चढ़ गई माँ तेरी चढ़ाईयां। 

तरी चढ़ाईयां – 2 तेरी  चढ़ाईयां माँ। 

मैं तो चढ़ गई माँ तेरी चढाईयां। 


       रजनी सिंह 
     

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