~जिंदगी कीआशा(2.10.97)

आशा की किरण छिप सा गया है, लेकिन अन्धेरा में रौशनी की किरण बाकी है।
जीवन की आशा अपूर्ण सी लगती है, लेकिन जीवन की लालसा बाकी है।

प्यार पाने की आशा में सब कुछ खो गया, लेकिन स्नेह पाने लालसा बाकी है।

सब कुछ खोने के बाद भी, कुछ पाने की चाह होती है।

जिन्दगी लूट जाती है, फिर भी जीने की राह होती है।

कोई कहता है जिंदगी बनाने से बनती है,

कोई कहता है जिंदगी विधाता की देन होती है।

लकीन ये जिंदगी न बनाने से बनती है, और न जिंदगी जीने का ढंग विधाता की देन होती है।
जिंदगी अपना निर्माण अपने किये कर्म, पाप – पुण्य से करती है।

रजनी सिंह

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